मुर्गे-मुर्गियों से अच्छा और ज्यादा उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि वो हेल्दी रहें. किसी भी तरह की बीमारियां उत्पादन करने वाले मुर्गे-मु्र्गियों को न हो. और इसके लिए जरूरी है कि पोल्ट्री फार्म और खासतौर पर पिंजड़ा (केज) साफ रहे. किसी भी तरह की गंदगी पिंजड़े के आसपास जमा न हो. पोल्ट्री के डॉक्टरों का कहना है कि जब पोल्ट्री फार्म में गंदगी जमा होने लगती है तो फिर मुर्गियों के बीच बीमारी फैलने का खतरा बन जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो ये गंदगी कई तरह की होती है. ज्यादातर बीमारियां संक्रमण की वजह से होती हैं.
पिंजड़े में बचा हुआ पानी और फीड (दाना) भी कई बार बीमारी की वजह बन जाता है. यहां तक की पोल्ट्री फार्म से निकले कचरे और खाद का सही तरह से निपटान न करने का असर कर्मचारियों और पक्षियों की सेहत पर पड़ता है. वहीं प्रोडक्ट की क्वालिटी भी खराब हो जाती है. अंडे-चिकन के दाम भी अच्छे नहीं मिलते हैं. और इस सब के चलते होता ये है कि पोल्ट्री फार्म की लागत बढ़ जाती है.
फार्म में बचे फीड का ऐसे करें निपटान
- मुर्गियों को खराब और फफूंद लगा पोल्ट्री फीड खाने को न दें.
- नमी और मुर्गियों के मल के संपर्क में आए फीड को फौरन हटा दें.
- फार्म से निकले खराब फीड को मिट्टी में दबा दें या खाद बना लें.
फार्म में बचे पानी के लिए करें ये उपाय
- पोल्ट्री फार्म के आसपास गंदी पानी जमा न होने दें.
- फार्म से निकले गंदे पानी को किसी गड्ढे या नाली में बहा दें.
- फार्म के अंदर पानी जमा न होने दें, इससे मक्खी और मच्छर पैदा होते हैं.
- जल प्रदूषण से बचने के लिए फार्म ऊंचे चबूतरे या कंक्रीट के फर्श पर बनाएं.
- जहां पानी जमा हो या स्टोर किया जाता है वहां गोबर जमा न करें.
साफ-सफाई के लिए अपनाएं ये उपाय
- पोल्ट्री फार्म से निकले कचरे का निपटान करते वक्त दस्ताने और जूते पहनें.
- खाद और मरी हुई मुर्गियों को निपटाने के बाद हाथ धोकर ही दूसरे काम करें.
- मरी हुई मुर्गियों को फार्म से दूर जमीन में गहरा गड्ढा कर दबा दें.
- मरी हुई मुर्गियों को जलाना मुमकिन हो तो जला दें.
- मरी हुई मुर्गियों को कभी भी खुले मैदान या तालाब-नदी में न फेंके.
- मरी हुई मुर्गियों के निपटान में इस्तेमाल होने वाले उपकरण कीटाणुरहित कर लें.
- फार्म में जहां कचरा और खाद जमा होती है वहां हर किसी को न जानें दें.
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