
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) किसी एक देश की परेशानी नहीं है. जो भी देश एनिमल प्रोडक्ट का उत्पादन कर रहे हैं वो इससे जरूर परेशान होंगे. भारत का डेयरी और मीट सेक्टर इससे खासा परेशान है. ये वो परेशानी है जिसके चलते न तो एनिमल प्रोडक्ट के अच्छे दाम मिलते हैं और न ही प्रोडक्ट एक्सपोर्ट होता है. हमारा देश दूध उत्पादन में भारत पहले नंबर पर है. अंडा उत्पादन में दूसरे और चिकन में चौथे नंबर पर हैं. बफैलो मीट उत्पादन में भी भारत ने कई बड़े देशों को पीछे छोड़ा हुआ है. लेकिन एक्सपोर्ट की बात करें तो बफैलो मीट को छोड़कर चिकन तो एक्सपोर्ट ही नहीं होता है.
अंडा-दूध की बात करें तो एक्सपोर्ट न के बराबर सिर्फ कागजों पर दर्ज करने लायक है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो AMR का एक इलाज सिर्फ ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाएं. और ये तभी मुमकिन होगा जब पशु बीमार ही न हो. और इसके लिए जरूरी है कि पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण कराया जाता रहे. इससे होता ये है कि टीका लगने से पशु बीमारी की चपेट में नहीं आता है.
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