
बाढ़ के पानी से 10-20 नहीं पूरे 16 सौ तालाब बर्बाद हो चुके हैं. गुजरात में आई बाढ़ ने झींगा के तालाबों को समतल कर दिया है. इसलिए अगर आप भी मछली पालन करते हैं और अभी आपके तालाब में मछलियां हैं तो अलर्ट हो जाएं. मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है. नदियों और नहरों में भी भरपूर पानी आ गया है. ऐसे में तालाबों को बाढ़ के पानी से बचाना बहुत जरूरी है. क्योंकि अगर तालाब का पानी साफ और प्रदूषण फ्री है तो ये मछलियों को हेल्दी बनाता है.
मछलियों की ग्रोथ और उन्हें बीमारियों से दूर रखने के लिए प्रदूषण मुक्त पानी बहुत जरूरी होता है. लेकिन बरसात और बाढ़ के चलते अक्सर तालाब का पानी प्रदूषित हो जाता है. मछली पालन जलकृषि के नाम से भी जाना जाता है, यही वजह है कि मछली पालन में साफ पानी की अहमियत बहुत बढ़ जाती है. पानी की तरफ से की गई जरा से भी अनदेखी मछली पालक को बड़ा नुकसान पहुंचाती है.
बरसात के दौरान पानी में प्रदूषण होने लगता है. यही वजह है कि मॉनसून के दौरान तालाब के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होना एक सामान्य बात है. लेकिन बड़ी बात यह है कि इसके चलते मछली पालक को कई बार बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. ऑक्सीजन की कमी के चलते मछलियां मरने लगती हैं. इसलिए समय-समय पर उपकरण की मदद से पानी का ऑक्सीजन और पीएच लेवल जांच लेना चाहिए. अगर ऑक्सीजन की कमी ज्यादा है तो मशीनों की मदद से ऑक्सीजन पानी में छोड़ी जानी चाहिए.
मछली पालक की मानें तो गर्मी और सर्दी में तालाब और टैंक के पानी का खासतौर पर ख्याल रखा जाता है. अगर सर्दी है तो तालाब और टैंक के पानी को ज्यादा ठंडा न होने दें. सुबह-शाम मोटर चलाकर ताजा पानी को मिलाकर तालाब के पानी को सामान्य कर दें. इसी तरह से गर्मी में ताजा पानी चलाकर उसकी गर्महाट को कम कर दें. इसके लिए तालाब के पास पानी की बड़ी मोटर का इंतजाम करके रखें.
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