
बरसात के दिनों में बकरे-बकरियों को होने वाली दो आम बीमारियां हैं. पहली डायरिया और दूसरी पेट में कीड़े होना. अगर दोनों की बीमारियों का वक्त पर इलाज नहीं किया गया तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती हैं. इतना ही नहीं जैसे ही बकरे-बकरियां इसकी चपेट में आते हैं तो उनके ग्रोथ रुक जाती है. उत्पादन कम हो जाता है. अगर दोनों ही बीमारियों की बात करें तो इनकी बड़ी वजह हरा चारा और पीने का पानी है. यही वजह है कि पशुओं के डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि मॉनसून में पशुओं को हरा चारा कम से कम खिलाना चाहिए.
साथ ही खिलाते वक्त जरूरी ऐहतियात बरतने की सलाह दी जाती है. वहीं अगर पशु दूषित पानी पी लेते हैं तो पेट में कीड़े होने की आशंका बढ़ जाती है. अगर बकरी पालक इस दौरान जरा सा भी अलर्ट रहते हैं तो बकरी की मेंगनी और उसकी आंखों को देखकर दोनों ही बीमारी के बारे में पता लगाया जा सकता है. इसी के आधार पर बकरी पालक भेड़-बकरी का इलाज भी करवा सकते हैं.
साइंटिस्ट डॉ. आरएस पवैया की मानें तो यह जरूरी नहीं कि डॉक्टर के पास ले जाने पर ही बकरी के पेट में होने वाले कीड़ों के बारे में पता चले. बकरी में होने वाले बदलावों को देखकर पशुपालक भी उसके बीमार होने का पला लगा सकते हैं. जैसे भेड़-बकरी के अंदर जब हिमोकस नाम का पैरासाइड पलने लगता है तो भेड़-बकरी की आंखों में बदलाव होने लगता है. क्योंकि हिमोकस भेड़-बकरी का खून चूसता है.
और जब यह खून चूसने लगता है तो इसकी संख्या भी बढ़ने लगती है. स्वस्थ भेड़-बकरी की आंखें एकदम से चमकीली लाल-गुलाबी होती हैं. लेकिन अगर उसके पेट में हिमोकस है तो आंख हल्की गुलाबी हो जाती है. जैसे-जैसे हिमोकस की संख्या बढ़ती जाती है और वो खून चूसते हैं तो भेड़-बकरी की आंख सफेद पड़ने लगती है. जिसका मतलब यह है कि भेड़ या बकरी में खून की कमी हो रही है.
डॉ. आरएस पवैया का कहना है कि एक स्वस्थ बकरी गोल, चमकदार और सॉलिड मेंगनी करती है. इसी से पता चल जाता है कि बकरी को कोई बीमारी नहीं है. अगर बकरी की मेंगनी आपस में चिपकी हुई और गुच्छे की शक्ल में आ रही है तो फौरन अलर्ट होने की जरूरत है. ये संकेत है कि आपकी बकरी बीमार होने वाली है. अगर मेंगनी पेस्ट जैसी कर रही है तो इसका मतलब कि बकरी की आंत में किसी न किसी तरह का इंफेक्शन हो चुका है. या फिर बकरी डायरिया की चपेट में आ चुकी है. ऐसे में सबसे पहले पशुपालक उन मेंगनी को एक जिप वाली पॉलीथिन में भरकर पशु चिकित्सा से जुड़ी किसी लैब में ले जाकर उसकी जांच करा ले.
बकरी के यूरिन की निगरानी से भी बकरियों की बीमारी के बारे में पता चल जाता है. पशुपालकों को ये देखते रहना चाहिए कि अगर बकरी का यूरिन भूसे यानि हल्के पीले रंग का है तो वो सामान्य है. अगर गहरे पीले रंग का यूरिन आ रहा है तो इसका मतलब बकरे-बकरी ने पानी कम पिया है और उन्हें डिहाइड्रेशन है. और अगर यह रंग और ज्यादा गहरा पीला हो जाए और उसमे लालपन आने लगे तो समझ जाइए कि बकरी और बकरे के यूरिन की जगह पर कोई चोट लगी है. और अगर कभी यूरिन कॉफी कलर का आने लगे तो समझिए कि उसके खून में इंफेक्शन है.
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