Shrimp Farming: ये परेशानियां दूर हों तो झींगा किसानों को मिलने लगेगा ज्यादा मुनाफा

Shrimp Farming: ये परेशानियां दूर हों तो झींगा किसानों को मिलने लगेगा ज्यादा मुनाफा

Shrimp Farming केन्द्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से झींगा खरीदने वालों की लिस्ट में बदलावा आया है. यूरोप, वियतनाम और चीन ने अपनी डिमांड बढ़ा दी है. अमेरिका की कम डिमांड की भरपाई यूरोप, वियतनाम और चीन से हो जा रही है. और अच्छी बात ये है कि झींगा एक्सपोर्टर अब कुछ चुनिंदा खरीदारों पर निर्भर नहीं हैं. 

shrimp exportshrimp export
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 30, 2026,
  • Updated Jul 30, 2026, 9:00 AM IST

अमेरिका-चीन हो या यूरोपीय देश, हर जगह भारतीय झींगा को बहुत पसंद किया जाता है. अब तो कई और दूसरे देश भी भारत से झींगा खरीदने लगे हैं. चीन में बड़े लेवल पर झींगा पालन होता है, बावजूद इसके वहां भारत का झींगा खूब पसंद किया जाता है. लेकिन इस वक्त झींगा के हाल खराब चल रहे हैं. झींगा पालन चौतरफा मुश्किलों से घि‍र गया है. मौजूदा हालात ने झींगा पालकों की टेंशन बढ़ा दी है. झींगा पालन से लेकर बाजार में उसे बेचने तक के हर मोर्चें पर झींगा किसान परेशान हाल हैं. झींगा पालकों का कहना है कि झींगा पालन की लागत बढ़ने से बाजार के हालात खराब हो गए हैं. 

माल ढुलाई भी महंगी हो गई है. इन सब वजहों के चलते विदेशी बाजारों में झींगा को बेचना मुश्किल हो गया है. और बड़ी परेशानी ये है कि हालात में जल्द राहत मिलती हुई नहीं दिख रही है. झींगा एक्सपर्ट की मानें तो अगर मौजूदा हालात में जल्द बदलाव नहीं आया तो छोटे किसान झींगा पालन से बाहर हो सकते हैं. और रही-सही कसर गुजरात में आई बाढ़ ने पूरी कर दी है. 1600 से ज्यादा झींगा तालाब बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गए हैं. 

ये हैं झींगा किसानों की परेशानियां 

झींगा किसान और एक्सपर्ट डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि आज झींगा किसान सिर्फ तालाब में झींगा पालन से ही नहीं उसे बाजार में बेचने जैसी परेशानियों से भी जूझ रहा है. लागत इतनी बढ़ चुकी है कि झींगा की लागत निकालना मुश्किल हो गया है. आइए जानते हैं कि झींगा किसान कौन-कौनसी परेशानियों से जूझ रहे हैं. 

बढ़ रही है लागत-

डॉ. मनोज का कहना है कि झींगा फीड, बीज (झींगा का बीज), लेबर और डीजल की कीमतें 15 से 30 फीसद तक बढ़ गई हैं. इतना ही नहीं एरेशन और प्रोसेसिंग भी महंगी हो गई है.

दो तरफा युद्ध से महंगा हुआ भाड़ा- 

डॉ. मनोज के मुताबिक झींगा की समुद्री माल ढुलाई आज भी साल 2019 रेट के मुकाबले दो गुना ज्यादा हैं. उस पर परेशानी ये भी है कि अगर ढुलाई में देरी और पोर्ट की दिक्कतों से सप्लाई रिस्क और डिस्काउंट बढ़ जाते हैं.

कम हो रही है डिमांड- 

डॉ. मनोज ने जानकारी दी है कि ग्राहक प्रोटीन के लिए झींगा को छोड़कर सस्ते प्रोडक्ट की ओर जा रहे हैं. इसी का नतीजा है कि यूएस और यूरोपियन यूनियन में झींगा का एक्सपोर्ट धीमा हो गया है. जिसके चलते झींगा की फार्मगेट की कीमतें ब्रेकइवन के करीब आ गई हैं.

हालात के चलते कम हुई स्टॉकिंग-

डॉ. मनोज कहते हैं कि झींगा पर चौतरफा जो परेशानी आई हैं उसके चलते झींगा किसानों ने झींगा की स्टॉकिंग कम कर दी है. किसान कैश फ्लो की दिक्कत का सामना कर रहे हैं. वहीं बुरी खबर ये है कि झींगा के छोटे किसानों के बाहर निकलने का रिस्क बढ़ गया है. 

पता नहीं कब मिलेगी राहत-

डॉ. मनोज बताते हैं कि झींगा पालन और एक्सपोर्ट में राहत मिलना माल ढुलाई के नॉर्मल होने, फीड की लागत कम होने और ग्राहकों के दोबारा से वापस झींगा की ओर लौटने पर निर्भर करता है. इसे देखते हुए तब तक झींगा बाजार कम मार्जिन से ही चलेगा.

ये भी पढ़ें:-

Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच 

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

MORE NEWS

Read more!