Shrimp in Flood: बाढ़ के पानी में समतल हो गए झींगा के 16 सौ तालाब, 800 करोड़ का हुआ नुकसान 

Shrimp in Flood: बाढ़ के पानी में समतल हो गए झींगा के 16 सौ तालाब, 800 करोड़ का हुआ नुकसान 

Shrimp in Flood गुजरात का साउथ इलाका झींगा पालन की वजह से बहुत खास माना जाता है. यहां के चार जिलों में खासतौर से बड़े पैमाने पर झींगा की खेती होती है. लेकिन बीते दिनों आई बाढ़ ने झींगा के तालाबों को समतल जमीन में बदल दिया है. हजारों टन झींगा बाढ़ के पानी में बह गया है. इतना ही नहीं तालाब में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी पानी के साथ बह गए हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 28, 2026,
  • Updated Jul 28, 2026, 12:52 PM IST

सूरत, नवसारी, वलसाड़ और भरुच साउथ गुजरात के वो इलाके हैं जहां बड़े पैमाने पर झींगा पालन किया जाता है. इसे झींगा फार्मिंग बेल्ट भी कहा जाता है. मुम्बई के रास्ते यहां होने वाला ज्यादातर झींगा दूसरे देशों को एक्सपोर्ट किया जाता है. लेकिन अफसोस की बात ये है कि अब यहां के ज्यादातर झींगा तालाब समतल हो चुके हैं. तालाब की जगह पर समतल जमीन और गंदगी रह गई है. ये वो गंदगी है जो बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई है. अचानक आई बाढ़ ने देखते ही देखते करीब 16 सौ तालाब को समतल जमीन में बदल दिया. 

झींगा एक्सपर्ट की मानें तो झींगा पालन को ये एक बड़ा झटका लगा है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बर्बाद होने वाले झींगा तालाबों में से करीब आधे तालाब का दोबारा से शुरू हो पाना मुश्किल है. बाढ़ की वजह से करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है. क्योंकि तालाब में झींगा तैयार हो चुका था. बस कुछ ही दिन बाद निकालकर बाजार की तैयारी करनी थी.  

महीनों लग जाएंगे दोबारा तैयार करने में 

झींगा किसान और एक्सपर्ट डॉ. मनोज शर्मा ने किसान तक को बताया कि बाढ़ के चलते झींगा तालाबों की जो हालत हो गई है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि तालाबों को झींगा पालन के लिए दोबारा से तैयार करने में तीन से चार महीने लग जाएंगे. क्योंकि बाढ़ के पानी संग आई गंदगी की वजह से नालियां जाम हो गई हैं. तालाब के बांध टूट गए. वहां रखे पम्प में गंदगी भर गई है. तालाब में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर मशीनरी खराब हो गई है या मिट्टी में दब गई है. स्टोर में रखा फीड पानी संग बह गया है या फिर पानी से भीगकर खराब हो गया है. 

ये हैं झींगा किसानों की मांग 

झींगा पालन से जुड़े किसान बाढ़ के चलते अपना सब कुछ खो चुके हैं. दोबारा से झींगा पालन करने के लिए उनके पास कुछ नहीं बचा है. यही वजह है कि किसान मुआवजे के साथ ही अपने लिए पुनर्वास पैकेज की मांग केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारों से कर रहे हैं. 

  • बाढ़ में खराब हुई फसल पर लिए गए लोन को चुकाने के लिए तुरंत मदद दी जाए. 
  • तालाबों को फिर से बनाने और बीज खरीदने के लिए कम ब्याज वाले लोन मंजूर किए जाएं.
  • बाढ़ में खराब हुए बांधों, पंप और एरेटर की मरम्मत के लिए सब्सिडी दी जाए. 
  • खेती की तरह झींगा पालकों को भी इंश्योरेंस और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने की मांग. 

ये भी पढ़ें:-

Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच 

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

MORE NEWS

Read more!