Animal Winter Care: नवंबर में ऐसे किया शेड और पशु का रखरखाब तो गाय-भैंस से भरपूर मिलेगा दूध

Animal Winter Care: नवंबर में ऐसे किया शेड और पशु का रखरखाब तो गाय-भैंस से भरपूर मिलेगा दूध

एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक पशुओं के शेड में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो सभी मौसम को ध्यान में रखकर बनवानी चाहिए. और इन चीजें का निर्माण उस इलाके के वातावरण को देखकर करवाने चाहिए. बाकी कुछ ऐसे छोटे-छोटे बदलाव होते हैं जो मौजूदा मौसम के हिसाब से किए जाते रहते हैं. लेकिन पशु शेड की तीन तरफ बनने वाली पांच फीट ऊंची दीवार हर जगह के लिए एक मानक है.  

नासि‍र हुसैन
  • NEW DELHI,
  • Oct 28, 2024,
  • Updated Oct 28, 2024, 2:35 PM IST

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अगर पशु जैसे गाय-भैंस खुश है तो वो ज्यादा उत्पादन करती है. और अगर किसी भी वजह से पशु किसी परेशानी या तनाव में है तो इसका सीधा असर उसके उत्पादन पर पड़ता है. तनाव में आने पर फौरन ही पशु का दूध उत्पादन कम हो जाता है. और पशु के तनाव में आने की बहुत सारी छोटी-बड़ी वजह होती हैं. इन वजहों में बदलता मौसम भी शामिल है. ये कोई जरूरी नहीं है कि पशु गर्म मौसम में ही सबसे ज्यादा तनाव में आते हैं. जैसे की अब सर्दी ने धीरे-धीरे दस्तक देनी शुरू कर दी है. सर्दियों का मौसम भी छोटे-बड़े सभी तरह के पशुओं पर विपरीत असर डालता है. इसलिए आने वाले सर्दी के मौसम से भी पशुओं को बचाना बहुत जरूरी है. 

ठंड और कोहरे के मौसम में पशुओं की उचित देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. हालांकि कुछ लोग ये भी कहते हैं कि पशुओं को ज्यादा से ज्यादा खुली जगह में रखना चाहिए, ऐसा करने से पशु अपने मनमुताबिक खुल में आराम से घूम-फिर सकें. और ऐसा करने से पशु के उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है. हालांकि ऐसा सर्दियों में दिन के वक्त किया जा सकता है जब मौसम सही हो, ज्यादा ठंड और कोहरा ना हो. क्योंकि हर मौसम के हिसाब से पशुओं के लिए शेड में इंतजाम करना भी जरूरी होता है. एक तय मानक के मुताबिक पशुओं का शेड कम से कम स्वच्छ, सुविधाजनक, आरामदायक हो और दूध निकालने के लिए शेड में अलग से जगह रखी गई हो. 

ये भी पढ़ें:मदर डेयरी और उत्तराखंड ने लांच किया गिर-बद्री गाय के दूध से बना घी और ट्रेसेबिलिटी सिस्टम

नवंबर से ही पशु शेड में कर लें ये बदलाव

अगर आपके गांव-शहर में तापमान 0 से 10 डिग्री तक जाता है तो फिर उसके मुताबिक ही आपको शेड की तैयारी करनी होगी. यहां तक की मौसम के हिसाब से ही पशुओं का खानपान भी तैयार होगा. पशु की बिछावन कैसी होगी ये भी बदलते तापमान के हिसाब से ही पशुपालक को तैयार करनी होगी. 
सरसों का तेल पशु को दी जानी वाली खुराक का दो फीसद देना चाहिए. 
पशु को हरा चारा और भरपूर मात्रा में सूखा चारा देना चाहिए. 
गुड़ का शीरा पांच से 10 फीसद तक दिया जा सकता है. 
देर शाम में भी पशुओं को हरा चारा खाने में देना चाहिए. 
पीने का पानी गर्म होना चाहिए. 
शेड को मोटे पर्दे से कवर करना चाहिए. 
शेड में गर्म हवा के लिए ब्लोअर और रेडिएटर का इस्तेमाल करना चाहिए. 
पशुओं की पीठ को खाली बोरी या कंबल से ढक देना चाहिए. 
पशु का बिस्तर सूखा होना चाहिए. 

तापमान 20 डिग्री भी रहे तो करें ये बदलाव 

10 से 20 डिग्री तापमान भी बहुत ठंडा होता है. ऐसे में जितनी एहतियात इंसान बरतते हैं, उतनी ही पशुओं के लिए भी बरती जानी चाहिए. क्योंकि ये वो मौसम होता है जहां जरा सी भी लापरवाही पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. 

ये भी पढ़ें: मैंने कभी नहीं खाया दिल्ली का पनीर...दिवाली से पहले डेयरी मंत्री ने बताई वजह

पशुओं को ठंड के तनाव से बचाने के लिए 10 फीसद एडिशनल सप्लीमेंट दे सकते हैं. 
पोषक तत्वों की जरूरत के मुताबिक हरा और सूखा चारा देना चाहिए. 
24 घंटे ताजा और साफ पीने का पानी पशुओं के आसपास होना चाहिए. 
पशुओं को दिन में तीन से चार बार खुराक देनी चाहिए. 

 

MORE NEWS

Read more!