स्मार्ट किसान ने लगाया बॉयोगैस प्लांट, अब पूरे गांव का मुफ्त में बन रहा है खाना

स्मार्ट किसान ने लगाया बॉयोगैस प्लांट, अब पूरे गांव का मुफ्त में बन रहा है खाना

देश के कई इलाकाें में आज भी बिजली और ईंधन की उचित व्यवस्था नहीं है. ज‍िसका समाधान एक स्मार्ट क‍िसान ने बॉयोगैस बनाकर न‍िकाला है. जो गांवों के लोगों को बॉयोगैस एनर्जी उपलब्ध करा रहा है. आइये जानते हैं क‍ि पूरा मामला क्या है.

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स्मार्ट किसान ने लगाया बॉयोगैस प्लांट, अब पूरे गांव का मुफ्त में बन रहा है खाना  बायोगैस का प्रयोग से आप रसोईं गैस के ईंधन से लेकर वाहनों के ईंधन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, बायोगैस की प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो Freepik

देश तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है. नए-नए प्रयोग के माध्यम से लोग खूब तरक्की कर रहे हैं.पंजाब के एक स्मार्ट किसान ने भी कुछ ऐसा ही कर द‍िखाया है. क‍िसान बायोगैस संयंत्र के माध्यम से पूरे गांव के लोगों को नि:शुल्क ईंधन और बिजली सप्लाई कर रहा है, जिससे गांव के लोगों में काफी खुशी का माहौल है. असल में आज भी देश के कई इलाके ऐसे हैं जहां बिजली और ईंधन की उचित व्यवस्था नहीं है ऐसे लोग इस तकनीक के माध्यम से आसानी से ईंधन और बिजली बना सकते हैं. इतना ही नहीं इस गैस का उपयोग वाहनों के ईंधन में भी किया जा सकता है. आइए जानते हैं बायोगैस से गांव के लोगों को क्या लाभ हुआ.

इस तरह से हो रहा गांव वालों को लाभ

पंजाब के स्मार्ट किसान गगनदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने 140 क्यूब का बायोगैस प्लांट लगाया और हर घर के बाहर उसे पाइप लाइन के माध्यम से कनेक्शन दिया. गगनदीप ने बताया कि वे हर घर को 2- 2 घण्टे तक दिन में 3 बार गैस सप्लाई करते हैं. इसके अलावा प्लांट नजदीक बने कुछ घरों में 24 घंटे गैस की सप्लाई करते हैं. इससे हर घर में महीने के लगभग 800 रुपये की बचत होती है.

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पूरे गांव का खाना बॉयोगैस से बन रहा 

गगनदीप के गांव में लाभान्वित लोगों ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के दिनों उन्हें गैस सिलेंडर मिलने में बड़ी परेशानी होती थी. लेकिन, अब पूरा गांव इसी बायो प्लांट से निकली गैस से खाना बनाता है वो भी बिना किसी खर्च के.

 

इस तरह से बनाया बायोगैस प्लांट

गगन ने 140 घन मीटर का भूमिगत पावर प्लांट बनाया, इसे से लगा एक डेयरी फार्म है. जिसमें करीब 150 गायें हैं. ये प्लांट डेयरी के दोनों ओर बनी नालियों से जुड़ा है. जिसमें गायों का मल मूत्र पानी के साथ बहकर लगातार प्लांट में जाता है. प्लांट में बनने वाली गैस पाइप के माध्यम से ऊपर उड़ जाती है और नीचे बचा गोबर खाद में परिवर्तित हो जाता है.

असल में इस प्लांट से 55- 75 फीसदी मीथेन गैस निकलती है. जिसका उपयोग न सिर्फ रसोई गैस में ईंधन और घर की बिजली के लिए होता है बल्कि इसे आप वाहनों के ईंधन के रूप में भी उपयोग में ले सकते हैं. इस तरह के प्रयोग से खर्च भी कम आता है साथ ही ये पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होते है. 

 

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