Success Story: सेब की खेती से सुषमा ने बदला अपना जीवन, दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगार

Success Story: सेब की खेती से सुषमा ने बदला अपना जीवन, दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगार

पामलाही की सुषमा मेहता ने पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए सेब की खेती में नवाचार किया और ‘पहाड़ी ज़ायका’ ब्रांड से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की. पढ़िए कैसे एक महिला ने अपने सपनों को हकीकत में बदला.

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Success Story: सेब की खेती से सुषमा ने बदला अपना जीवन, दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगारसुषमा की सफलता की कहानी

हिमाचल प्रदेश के शिमला के निकट पामलाही की शांत, हरी-भरी पहाड़ियों में एक छोटी सी बस्ती बसती है. यहां की हरियाली में जीवन अपनी मधुर लय में चलता है. इसी बस्ती में सुषमा मेहता ने अपने मजबूत सपनों की उमंग और आशा की किरण से न केवल अपने जीवन में, बल्कि पूरे समुदाय में क्रांतिकारी बदलाव लायीं. सुषमा, एक साधारण किसान महिला हैं, उन्होंने अपने आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत से यह साबित कर दिया कि चुनौतियां सिर्फ नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं.

संघर्ष और शुरुआती चुनौतियां

हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, सुषमा ने तय किए रास्ते पर चलने के बजाय कुछ अलग करने की ठानी. शादी के बाद जब उनका सामना एक रूटीन भरी ज़िंदगी और सीमित संसाधनों से हुआ, तब भी उनमें यह जोश था कि कुछ बड़ा किया जा सकता है. उनके पति के सेब के बाग परिवार की एकमात्र आय का स्रोत था, पर सेब उतनी गुणवत्ता नहीं दे पा रहे थे, जितनी कि हो सकती थी. ऐसे मोड़ पर बहुत लोग हार मान लेते हैं, लेकिन सुषमा के अंदर एक अटूट विश्वास था- "मैं बदलाव ला सकती हूं."  

शुरुआत में खेती के बारे में जानकारी कम थी, लेकिन सुषमा का उत्साह और सीखने की लगन किसी बुजुर्ग साधु की तरह चमक रही थी. उनके ससुराल वालों ने भी उनकी इस ऊर्जा को देखा और कहा, "अगर तुम चाहो तो जरूर कुछ नया कर सकती हो." इस प्रोत्साहन से भरे हर शब्द ने सुषमा के दिल में उम्मीद की नई लौ जगाई.

नया प्रयोग- उम्मीद के बीज  

एक सुनहरी सुबह जब उन्होंने अपने आस-पास के खेतों को देखा, तो उन्हें महसूस हुआ कि परिवर्तन की जरूरत समय की मांग है. किसी पड़ोसी के कहने पर, उन्होंने यारा फर्टिलाइजर्स द्वारा आयोजित फील्ड डेमोस्ट्रेशन में हिस्सा लिया. वहां की चर्चा और तकनीकों ने सुषमा के दिल में एक नया सपना संजोया- क्यों न खेती को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाए?  

यारा टीम द्वारा मिट्टी के विश्लेषण और नई पद्धति के बारे में बताते हुए, सुषमा के आंखों में चमक आ गई. उनके मन में उमंग थी कि अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो पेड़ भी भावुक हो उठेंगे और फल मिलेंगे तो जैसे आशाओं के नया सिरे से जन्म हो जाएगा. धीरे-धीरे, उनके सेब के पेड़, जो पहले मुश्किले झेले थे, अब हरे पत्तों में ढले और चमकीले फलों से बढ़ते दिखाई दिए. उनकी कड़ी मेहनत ने अंततः रंग लाया और परिवार की आमदनी में निराशा की जगह उम्मीद ने घर कर लिया.

समस्या से अवसर तक की यात्रा

जब पहली सफलता की खुशियाँ दिल में समाने लगीं, वहीं नयी चुनौतियों ने भी साथ में दस्तक दीं. बाज़ार तक सेब पहूंचाने में देर की वजह से कई बार फल खराब हो जाते थे. लेकिन सुषमा ने इस समस्या को एक चुनौती के बजाय एक अवसर समझा.  

अपने छोटे, रोशन रसोईघर में, जहां हर दीवार पर ज़िंदगी के संघर्ष झलकते थे, उन्होंने अतिरिक्त सेबों से कुछ नया करने का सोचा. उन्होंने अपने हाथों से जैम, जेली और स्वादिष्ट व्यंजनों की रेसिपी बनाई, जिसे उन्होंने बड़े प्यार से "पहाड़ी ज़ायका" का नाम दिया. यहां न केवल सेबों का उपयोग हो रहा था, बल्कि हर एक उत्पाद में पहाड़ी की ताजगी, मां की ममता और आस्था की खुशबू भी थी. उनके उत्पादों की खुशबू मानो सीधे दिल तक पहूंचती थी.

सामुदायिक संघर्ष और सफलता  

सफलता की राह में अकेले चलना हमेशा आसान नहीं होता. सुषमा ने अपनी इस सफलता को अपने तक सीमित रखने के बजाय समाज में बांटने का निर्णय लिया. अपने अनुभव और संघर्ष से सीखते हुए, उन्होंने आठ अन्य महिलाओं को साथ लाने का निश्चय किया.  

इन महिलाओं ने, जिनकी अपनी-अपनी कहानियां थीं, मिलकर एक 'एकता सेल्फ-हेल्प ग्रुप' की नींव रखी. इस समूह में सभी महिलाएं न केवल अपने लिए आर्थिक स्वतंत्रता पाने लगीं बल्कि एक दूसरे का सहारा बनकर, अपने जीवन में आत्म-सम्मान का प्रकाश भरने लगीं. यह समूह एक ऐसे परिवार की तरह था जहां हर कोई एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल था.

प्रेरणादायक समापन

आज जब सुषमा अपने गुलाबी आसमान के नीचे, खूबसूरत सेब के बागों में टहलती हैं, तो वे केवल पेड़ों को नहीं देखतीं. उनके लिए हर पेड़ एक यादगार मोड़, हर फल एक सपने की कहानी है. वे महसूस करती हैं कि कैसे कठिनाइयों में छुपी हुई आशा, जब सही दिशा में पनफूटी, तो सफलता की मिठास बनकर सामने आई.  

उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशें, यदि दिल से की जाएं, तो बड़े बदलाव की चाभी बन सकती हैं. सुषमा मेहता ने न केवल अपने जीवन में बल्कि अपने समुदाय में भी वह सकारात्मक बदलाव लाया जिसे देखकर हर कोई प्रेरणा ले सके.

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