किसान सेकश्मीर के हिलाल शेख बादाम-अखरोट की खेती करते हैं. दो साल पहले तक ब्रोकर खेत में आता था और अपनी मर्जी के दाम देकर फसल खरीद लेता था. मजबूरी थी, इसलिए ब्रोकर को बेचनी पड़ती थी. उत्तराखंड में दमयंती दीदी और उनके जैसे सैंकड़ों परिवारों के पास के पास बद्री नस्ल की गाय हैं. बद्री गाय के दूध को अमृत माना जाता था. लेकिन उसका कोई खरीदार नहीं था तो चाय बनाकर घर में ही इस्तेमाल कर लेते थे. ये दो उदाहरण तो यहां बताए जा रहे हैं. ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जिनकी अब तस्वीर बदल चुकी है.
जैसे हिलाल अब अपने और अपने जैसे दर्जनों किसानों के बादाम-अखरोट को ब्रांड बनाकर सीधे खेतों से खुद के तय किए हुए दाम पर बेच रहे हैं. दमयंती दीदी दूध से मक्खन बनाकर बेच रही हैं और हर महीने उनके खाते में पैसे आ रहे हैं. और ये सब मुमकिन हुआ किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) और किसान से की मदद से. आज 10 राज्यों के 50 हजार से ज्यादा किसान सीधे खेत से ही अपनी किसान से के प्लेटफार्म पर बेच रहे हैं.
बीएमएस एफपीसी का संचालन करने वाले भानू प्रताप सिंह ने किसान तक को बताया कि आज उनके साथ हजारों किसान जुड़े हुए हैं. रसोई का ज्यादातर सामान वो खेत से सीधे ही बेच रहे हैं. अब उनका बाजार में मोरिंगा सत्तू भी आ रहा है. मोरिंगा की खासियत से सभी वाकिफ हैं. इसमे मोरिंगा के साथ चना, जो भी होगा तो जीरा और हींग इसके स्वाद को बढ़ाएंगे.
किसान से (KisaanSay) के फाउंडर नितिन पुरी ने किसान तक से बातचीत करते हुए बताया कि किसान से एक 'डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन' फूड ब्रांड है. देश में अभी इसके एक लाख से ज्यादा ग्राहक हैं. किसान से भारत के 10 राज्यों में फैले 25 एफपीसी की मदद से 100 से ज्यादा 'सिंगल-ओरिजिन' फूड प्रोडक्ट्स बेच रहा है. जहां प्रोडक्ट का उत्पादन होता है वहीं उसे मानकों को पूरा करने वाली अच्छी पैकिंग के साथ पैक किया जाता है. पैकिंग पर किसान की एफपीसी का नाम को ब्रांड के रूप में लिखा होता है. ट्रेसेबिलिटी के लिए एक बार कोड दिया होता है. और सबसे खास बात ये है कि ग्राहक से जो दाम मिलते हैं उसका 50 फीसद से ज्यादा हिस्सा किसानों के खाते में डाल दिया जाता है.
नितिन पुरी ने बताया कि हमने पिछले दो सालों में किसानों के साथ पार्टनरशिप करके हमने भारत का सबसे बड़ा 'सिंगल ओरिजिन' फूड ब्रांड बनाया है. 20 जून को दिल्ली में किसान से की पहली किसान मीट आयोजित की गई थी. हम इस प्लेटफार्म से 'को-ब्रांड, को-प्रॉफिट' पार्टनरशिप मॉडल के की मदद से ग्राहकों को कई तरह के 100 फीसद सिंगल ओरिजिन फूड प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रहे हैं. इस प्लेटफार्म को किसानों और ग्राहकों के बीच की दूरी को कम करने के मकसद से भी बनाया गया है.
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