तीन राज्यों में एनालॉग पनीर पर बैन, तो बाकी राज्यों में क्यों नहीं? खाने से पहले डॉक्टर की जानें राय

तीन राज्यों में एनालॉग पनीर पर बैन, तो बाकी राज्यों में क्यों नहीं? खाने से पहले डॉक्टर की जानें राय

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में एनालॉग पनीर को लेकर हुई कार्रवाई के बाद अब दूसरे राज्यों में भी इसकी बिक्री और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. आखिर अगर किसी उत्पाद को लेकर खाद्य सुरक्षा की चिंता सामने आ रही है, तो क्या देशभर में इसकी जांच नहीं होनी चाहिए? इस मामले पर फिजिशियन डॉक्टर की राय भी अहम है.

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तीन राज्यों में एनालॉग पनीर पर बैन, तो बाकी राज्यों में क्यों नहीं? खाने से पहले डॉक्टर की जानें रायएनालॉग पनीर

सोचिए, आप बाजार से पनीर खरीद रहे हैं, किसी रेस्टोरेंट में पनीर की डिश ऑर्डर कर रहे हैं या घर में पनीर की सब्जी बना रहे हैं… तो क्या आपको यकीन है कि आपकी प्लेट में रखा पनीर दूध से बना है, या फिर वह सिर्फ पनीर जैसा दिखने वाला ‘एनालॉग पनीर’ है? दरअसल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में एनालॉग यानी नॉन-डेयरी पनीर पर बैन लगने के बाद अब दूसरे राज्यों में भी इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर सवाल उठने लगे हैं. सवाल सीधा है- अगर एक ही तरह के उत्पाद की क्वालिटी और बिक्री को लेकर तीन राज्यों में सख्ती की जरूरत पड़ रही है, तो बाकी राज्यों में इसकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

आखिर जो उत्पाद एक राज्य में खाद्य सुरक्षा जांच और कार्रवाई का विषय बन रहा है, वह दूसरे राज्य में बिना किसी सवाल के कैसे बिक सकता है? इसके अलावा आखिर एनालॉग पनीर सेहत के लिए कितना सुरक्षित है और इसे लेकर डॉक्टर की क्या राय है? साथ ही, इसे खरीदते या खाते समय उपभोक्ताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं.

आखिर क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है. इसे बनाने में दूध के बजाय वनस्पति तेल या फैट, पाम आयल, स्टार्च, सोया या दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा स्वाद और पनीर जैसी बनावट देने के लिए स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और फ्लेवर जैसी सामग्री भी मिलाई जाती है. इसका रंग, स्वाद और बनावट कई बार असली पनीर जैसी होती है, इसलिए आम ग्राहक के लिए दोनों में अंतर करना आसान नहीं होता.

एनालॉग पनीर पर डॉक्टर ने क्या कहा?

इस मुद्दे पर बात करने वाले सीनियर फिजिशियन डॉक्टर सुरेंद्र दत्ता ने 'किसान तक' को बताया कि एनालॉग पनीर को लेकर पूरे देश में जांच और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है. उनका कहना है कि किसी भी उत्पाद को सिर्फ उसके नाम से सुरक्षित या असुरक्षित नहीं माना जा सकता. पहले उसकी सामग्री और क्वालिटी की जांच होनी चाहिए. डॉक्टर के मुताबिक, अगर किसी एनालॉग पनीर में खराब क्वालिटी वाले फैट, मिलावटी सामग्री, असुरक्षित एडिटिव या निर्धारित मानकों से बाहर की चीजें इस्तेमाल की गई हों और उसका लगातार सेवन किया जाए, तो स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, ऐसे मामलों में खासतौर पर किडनी, लीवर और हृदय से जुड़ी समस्याएं हो सकती है.

ग्राहकों को देनी होगी पूरी जानकारी

हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के नाम पर बेचकर ग्राहक को गुमराह नहीं किया जा सकता. अगर किसी खाद्य उत्पाद में गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी सही जानकारी ग्राहक को देना जरूरी है. FSSAI ने अप्रैल 2026 में केंद्रीय लाइसेंस वाले फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को भी निर्देश दिया था कि अगर वे चीज एनालॉग जैसे उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे ‘पनीर’ के नाम से नहीं बेचा जा सकता. मेन्यू या डिस्प्ले में ग्राहक को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि इस्तेमाल किया जा रहा उत्पाद एनालॉग है.

FSSAI ने तैयार किया है ये नियम

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों में डेयरी एनालॉग के लिए अलग प्रावधान हैं. FSSAI के अनुसार, अगर किसी उत्पाद में दूध के फैट या प्रोटीन की जगह गैर-डेयरी सामग्री जैसे पॉम आयल, फैट या प्लांट प्रोटीन का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी जानकारी लेबल पर स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए. जिन डेयरी एनालॉग के लिए अलग पहचान मानक नहीं हैं, उनके लेबल पर ‘Analogue’ लिखना जरूरी है.

पैकेट खरीदते समय क्या देखें?

डॉक्टर और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के मुताबिक, पैकेट वाला उत्पाद खरीदते समय कुछ चीजें जरूर जांचें-

  • पैकेट पर Analogue या Non-Dairy लिखा है या नहीं.
  • उसमें किस तरह का फैट या तेल इस्तेमाल हुआ है, यह देखें.
  • FSSAI लाइसेंस की जानकारी जांचें.
  • पैकिंग और एक्सपायरी डेट जरूर देखें.
  • पैकेट फूला हुआ, क्षतिग्रस्त या संदिग्ध हो तो उसे न खरीदें.
  • होटल या रेस्टोरेंट में पनीर की डिश लेते समय जरूरत पड़ने पर पूछें कि उसमें डेयरी पनीर इस्तेमाल हुआ है या एनालॉग.

क्या पूरे देश में बैन होना चाहिए?

सीनियर फिजिशियन डॉक्टर सुरेंद्र दत्ता ने बताया कि यह फैसला केवल किसी एक उत्पाद के नाम पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच के आधार पर होना चाहिए.अगर किसी राज्य में लिए गए सैंपल में मानकों का उल्लंघन मिलता है, तो देश के दूसरे राज्यों में भी सैंपल लेकर जांच करना चाहिए. यानी सवाल यह नहीं है कि हर एनालॉग पनीर खतरनाक है या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या जो उत्पाद ग्राहक को पनीर के नाम पर बेचा जा रहा है, वह सही तरीके से लेबल किया गया है, उसकी सामग्री सुरक्षित है और वह FSSAI के तय मानकों का पालन करता है या नहीं.

आम लोगों के लिए सीधी सलाह

घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर रखें. अगर किसी एनालॉग पनीर को लेकर संदेह है तो उसकी पैकिंग और सामग्री की जानकारी देखें. किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, बच्चे या बुजुर्ग के लिए इसे नियमित भोजन में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनालॉग पनीर और असली डेयरी पनीर को एक ही चीज न समझें. ग्राहक को यह जानने का अधिकार है कि वह जो पनीर खा रहा है, वह दूध से बना है या किसी और चीज से तैयार किया गया है.  

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