सरकार का बड़ा फैसला: जून तक का मुफ्त राशन पहले बांटने का निर्देश, गोदामों में भरा पड़ा है अनाज

सरकार का बड़ा फैसला: जून तक का मुफ्त राशन पहले बांटने का निर्देश, गोदामों में भरा पड़ा है अनाज

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जून 2026 तक का मुफ्त राशन सेंट्रल पूल से पहले ही उठाकर तुरंत लाभार्थियों में बांटने का निर्देश दिया है. FCI के गोदामों में चावल और गेहूं का स्टॉक बहुत ज्यादा होने और नई खरीद के लिए जगह कम होने के कारण यह फैसला लिया गया है.

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सरकार का बड़ा फैसला: जून तक का मुफ्त राशन पहले बांटने का निर्देश, गोदामों में भरा पड़ा है अनाजमुफ्त राशन पहले बांटने का निर्देश

सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे मुफ्त अनाज योजना के तहत सेंट्रल पूल से तीन महीने (जून तक) का चावल और गेहूं पहले ही उठा लें और उन्हें तुरंत लाभार्थियों में बांट दें. यह निर्देश इसलिए दिया गया है क्योंकि सरकारी गोदाम चावल और गेहूं के स्टॉक से भरे हुए हैं, और गेहूं की नई खरीद को रखने के लिए बहुत कम जगह बची है, जो अगले कुछ हफ्तों में शुरू होने वाली है.

खाद्य मंत्रालय ने राज्यों के खाद्य सचिवों को भेजे एक पत्र में कहा, "देश में आने वाले खरीद सीजन और उसके कारण राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लॉजिस्टिक्स और भंडारण में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए, यह फैसला किया गया है कि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश NFSA के तहत जून 2026 तक आवंटित अनाज को पहले ही उठा लेंगे और उन्हें तुरंत लाभार्थियों में बांट देंगे." 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी.

FCI को निर्देश

मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भी निर्देश दिया कि वह अपने गोदामों में अनाज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करे. FCI से यह भी कहा गया है कि वह अनाज को पहले ही उठाने के लिए जरूरी कदम उठाने में राज्यों के साथ तालमेल बिठाए.

गुरुवार तक, FCI के पास 372 लाख टन (MT) चावल और 235 लाख टन गेहूं का स्टॉक था. अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों अनाजों का कुल स्टॉक लगभग 607 लाख टन है, जो 1 अप्रैल तक जरूरी 21 MT के बफर स्टॉक से 185% ज्यादा है. इस मौजूदा स्टॉक में लगभग 39 MT चावल शामिल नहीं है, जो अभी मिल मालिकों से मिलना बाकी है.

अधिकारियों ने कहा कि 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को अनाज का यह एक बार का एडवांस वितरण दो मकसद पूरे करेगा - एक तो यह कि ताजा खरीदे गए अनाज को रखने के लिए जगह बढ़ जाएगी, और दूसरा यह कि सप्लाई चेन पर दबाव कम होगा, खासकर ईरान युद्ध के समय. अभी सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल सहित सप्लाई की दिक्कतों से निपटने की कोशिश कर रही है.

OMS स्कीम जारी

खरीद के लिए मौजूदा 'ओपन-एंडेड' (खुली) नीति के कारण, सेंट्रल पूल में चावल का स्टॉक लगातार बढ़ रहा है. ऐसा तब हो रहा है, जब सरकार इस मुख्य अनाज को खुले बाजार में बेच रही है, राज्यों को स्टॉक बांट रही है, और यहां तक कि इथेनॉल बनाने के लिए भी इसकी सप्लाई कर रही है.

ताजा अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1741.44 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि रबी खाद्यान्न उत्पादन 1745.13 लाख मीट्रिक टन आंका गया है. यह पिछले वर्ष के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है. पिछले वर्ष खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1694.60 लाख मीट्रिक टन और रबी खाद्यान्न उत्पादन 1691.66 लाख मीट्रिक टन रहा था.

खाद्यान्न का बंपर उत्पादन

दूसरे अग्र‍िम अनुमान में धान उत्पादन के मामले में भी बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है. खरीफ धान का उत्पादन 1239.28 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. वहीं, रबी धान का उत्पादन 167.20 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया गया है. गेहूं के उत्पादन में भी बढ़ोतरी का संकेत मिला है और इसका अनुमान 1202.10 लाख मीट्रिक टन लगाया गया है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन से अधिक है.

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