CM N Chandrababu Naiduआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में कृषि और बागवानी क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का लक्ष्य बागवानी क्षेत्र को बढ़ाकर 50 लाख एकड़ तक पहुंचाना और किसानों की आय में ठोस बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है. सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे राज्य में बागवानी को संगठित तरीके से बढ़ाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए. खासतौर पर रायालसीमा क्षेत्र को क्लस्टर आधारित मॉडल के जरिए एक प्रमुख बागवानी हब के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर उत्पादन और बाजार दोनों मजबूत हो सकें.
राज्य सरकार एक स्पेशल “कोको सिटी” स्थापित करने की तैयारी में है, जिसे आधुनिक खेती और वैल्यू एडिशन का अनुभव केंद्र बनाया जाएगा. करीब 250 एकड़ में बनने वाली इस परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं. यह केंद्र प्रगतिशील किसानों को नई तकनीकों और बाजार आधारित उत्पादन से जोड़ने में मदद करेगा.
सीएम ने कहा कि किसानों को पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर बाजार की मांग के अनुसार खेती करनी होगी. इसके लिए उन्हें अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर मार्गदर्शन दिया जाएगा. साथ ही, जमीन को पूरे साल उत्पादक बनाए रखने के लिए मल्टी-क्रॉपिंग सिस्टम अपनाने पर भी जोर दिया गया है.
राज्य में प्राकृतिक खेती को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार 2025-26 में 9 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में करीब 18 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है. अब 2026-27 में इसे सभी 13,300 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित कर 25 लाख किसानों और 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही सर्टिफिकेशन आधारित मार्केटिंग के जरिए किसानों को बेहतर कीमत दिलाने की योजना है.
सरकार एवोकाडो, अंजीर, अमरूद, कटहल और काली मिर्च जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के विस्तार पर काम करेगी. अंजीर जैसे फलों को ड्राई फ्रूट में प्रोसेस कर अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. इसके अलावा अराकू क्षेत्र में केसर की खेती की संभावनाएं तलाशने और अनंतपुर में सेब उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाने की दिशा में भी पहल होगी.
आंध्र प्रदेश मशरूम मिशन 2026-31 के तहत सालाना एक लाख टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. वहीं, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसान परिवारों को डेयरी और पशुपालन से अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.
राज्य में चल रहे फसल सर्वे के साथ ‘फार्मर ऐप’ को किसानों के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें भूमि, फसल, मिट्टी परीक्षण, मौसम पूर्वानुमान और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है. अभी तक 8 लाख से अधिक किसान इस ऐप से जुड़ चुके हैं.
अधिकारियों ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम, लगभग 92 प्रतिशत रह सकता है. अल नीनो के प्रभाव से अनंतपुर, कडप्पा, कुरनूल जैसे वर्षा आधारित क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका है, जिससे दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों पर असर पड़ सकता है.
कम बारिश के जोखिम को देखते हुए राज्य में प्री-मॉनसून ड्राई सॉइंग (PMDS) तकनीक लागू की जा रही है. इसके तहत बारिश से पहले बुवाई की जाती है, जिससे उत्पादन में सुधार, लागत में कमी और प्रति एकड़ 5,000 से 7,000 रुपये तक अतिरिक्त आय संभव बताई गई है. इस साल 20 लाख एकड़ में इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. (पीटीआई)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today