नांदेड़ के किसानों को मिलेगा PMFBY के तहत मुआवजा (सांकेतिक तस्वीर)महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में किसानों को फसल बीमा के तहत बड़ी राहत मिली है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पहले चरण में 813.93 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी गई है, जो राज्य में सबसे ज्यादा है. जिला प्रशासन के अनुसार, शेष 21 राजस्व सर्किल के दावों के निपटारे के बाद यह राशि 900 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंचने की संभावना है. जिले में कुल 4,34,819 किसान इस योजना के तहत कवर हैं और 8,29,737 बीमा आवेदन दर्ज किए गए हैं. बीमित क्षेत्र 5,13,900 हेक्टेयर है, जबकि प्रभावित क्षेत्र 7,27,932 हेक्टेयर रिकॉर्ड किया गया है.
जिला कलेक्टर राहुल कर्डिले ने बताया कि यह उपलब्धि विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय और योजनाबद्ध तरीके से काम करने का परिणाम है. दरअसल, राज्य में हाल के समय में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है.
इससे पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अप्रैल की शुरुआत में कहा था कि सरकार प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता देगी. उन्होंने साफ किया था कि महाराष्ट्र में जब भी बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि होती है तो सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाता है और इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी. बता दें कि मार्च से शुरुआती अप्रैल के दौरान राज्य के कई जिलों में इस प्राकृतिक आपदा का व्यापक असर देखा गया था.
नासिक, अहिल्यानगर, जलगांव, धुले, बुलढाणा और छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में खड़ी और कटी हुई रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ था. भारी बारिश, ओलावृष्टि और आंधी के चलते गेहूं, चना, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें कई जगहों पर जमीन पर गिर गई थीं, जबकि अंगूर, अनार और आम के बागों में फल झड़ने की घटनाएं सामने आई थीं.
इसके अलावा पुणे और नासिक जिलों में भी भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे हजारों किसान प्रभावित हुए. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस बेमौसम मौसम से 1.22 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान हुआ था और 82,000 से ज्यादा किसान प्रभावित हुए. ऐसे हालात में नांदेड़ को मिला बीमा मुआवजा किसानों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
इस बीच, राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में लागत और उत्पादन के बदलते समीकरणों को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने मंगलवार को राज्य के चार कृषि विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे फसल पैटर्न और उत्पादन लागत का विस्तृत अध्ययन करें, ताकि बदलते मौसम के प्रभाव को समझते हुए सही मूल्य निर्धारण किया जा सके. इससे किसानों को उनकी फसल का सही भाव मिलेगा और नुकसान होने पर उचित मुआवजा देने में मदद मिलेगी. (एजेंसी)
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