किसान कारवांगंगा और रामगंगा नदियों के बदौलत बिजनौर जिले की मिट्टी केवल उपजाऊ ही नहीं, बल्कि कृषि उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बना रही है. गन्ने की मिठास के बदौलत जनपद के किसान खुशहाल जिंदगी की होली खेल रहे हैं. वहीं, इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल से शुरू हुआ किसान कारवां प्रदेश के 75 जिलों की यात्रा में 66वें जनपद के तौर पर बिजनौर पहुंचा. बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जनपद के नगीना गांव में महिला और पुरुष किसानों ने कारवां कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया. कृषि की विभिन्न फसलों के साथ-साथ पशुपालन और जलवायु परिवर्तन से खेती में आ रहे बदलाव को लेकर केवीके बिजनौर, कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विस्तृत जानकारी दी. साथ ही सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में भी किसानों को अवगत कराया.
यूपी में गंगा का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले जनपद बिजनौर में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान केवल कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों सहित पशुपालन से जुड़े अधिकारियों की सहभागिता ही नहीं रही, बल्कि उर्वरक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले- इफको, इफको एमसी, धानुका के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जहां उन्होंने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी सहित उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को लेकर किसानों को जागरूक किया. कार्यक्रम के दौरान किसानों के मनोरंजन के लिए जादूगर ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां रोचक अंदाज में प्रस्तुत कीं. इसके अलावा, 12 किसानों को लकी ड्रॉ के माध्यम से नकद पुरस्कार भी वितरित किए गए. साथ ही प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए.
पहले चरण में केवीके बिजनौर की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने किसानों को वैज्ञानिक विधि से बागवानी करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को आम की बागीचा लगाने के सही समय और सही तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी. आगे उन्होंने कहा कि किसान वैसे फलदार पौधों का चयन करें, जो हर साल फल दें. वैसे फलों की बागवानी करने की जरूरत नहीं है, जो 1 साल के अंतराल पर फल दें. इसलिए किसान जब भी कोई आम का पौधा या फलदार वृक्ष की बागवानी करें, तो वह मान्यता प्राप्त नर्सरी और संस्थान से ही खरीदें. आगे उन्होंने कहा कि किसान अगर बागवानी करना चाहते हैं, तो वह जून-जुलाई में पौधा लगाएं. अभी जो समय है, इसमें पौधा न लगाएं, क्योंकि बहुत गर्मी है और पौधे के सूखने की संभावना अधिक रहती है.
दूसरे चरण में बिजनौर इफको के प्रतिनिधि शिवम तिवारी ने किसानों को गोबर खाद के साथ ढैंचा खेती करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि यह किसानों के बीच अपनी जगह कैसे बना पाया है और इसके इतिहास का भी जिक्र किया. साथ ही उन्होंने नैनो डीएपी, नैनो यूरिया सहित नैनो जिंक से जुड़े उत्पादों के बारे में किसानों को बताया और समझाया कि आने वाले दिनों में अब किसानों को इन्हीं उत्पादों के साथ खेती में आमदनी बढ़ानी है.
तीसरे चरण में बिजनौर से इफको एमसी के प्रतिनिधि शंकी सोम ने किसानों को माइको जैन, शिरासागी, हुयूमेत्शू उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. आगे उन्होंने गन्ना फसल में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव से जुड़ी जानकारी देते हुए शिरासागी और मोयासी के बारे में बताया. आगे उन्होंने इससे भी अच्छा बताया कि इफको एमसी के जो पैकेट आते हैं, अलग-अलग कलर के उनके अलग-अलग काम होते हैं. विशेष तौर से पीले कलर के डब्बे में आने वाले उत्पाद कीटनाशक रोधक के क्षेत्र में उपयोग किए जाते हैं. नीले कलर के पैकेट फफूंदनाशक, हरे रंग के पैकेट खरपतवार के लिए और गुलाबी कलर के पैकेट पौधों के विकास की दवा के लिए आते हैं. जब भी किसान एमसी के कोई उत्पाद खरीदें, तो पैकेट का कलर जरूर देखें. इससे पता चल जाएगा कि वह जिस चीज के लिए दवा ले रहे हैं, वही दवा उन्होंने बाजार से खरीदी है.
चौथे चरण में जिला उद्यान अधिकारी आर. एन. वर्मा ने किसानों को फूलों की खेती के साथ मसाले की खेती, मधुमक्खी पालन सहित करने को लेकर जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने फूड प्रोसेसिंग को लेकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार द्वारा अधिकतम 5 करोड़ रुपए की राशि तय की गई है और इसके लिए सरकार द्वारा 35 फीसदी तक सब्सिडी भी दिया जाता है. आगे उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के बारे में भी किसानों को बताया और किसान कैसे लाभ ले सकते हैं, इसके बारे में भी पूरी जानकारी किसानों को दी.
पांचवें चरण में बिजनौर सीवीओ डॉ. डी. के. अग्रवाल ने कहा कि पशुओं के इलाज के लिए दरवाजे तक सुविधा पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है और इसका लाभ किसान ले सकते हैं. वहीं, हाल के समय में कुल 10 गाड़ियां जिले में हैं. उन्होंने कहा कि इस एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए किसान को मात्र 5 रुपये की राशि देनी है. इसके साथ उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन योजना के बारे में भी किसानों को बताया और कहा कि किसान अपने पशुओं का बीमा भी करवा सकते हैं. इसका लाभ यह है कि अगर किसी कारण से पशु की मृत्यु होती है, तो बीमा कंपनी के द्वारा राशि दी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान अपने पशुओं का 50 से 60 हजार तक का बीमा करवाते हैं, तो एक साल में करीब 500 रुपये के आसपास की राशि किसान को देनी पड़ती है.
छठवें चरण में धानुका प्रतिनिधि आशुतोष त्रिवेदी ने कंपनी के 90 उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को धानुका के कोनिका, सेम्प्रा सहित अन्य उत्पादों का धान, गेहूं, गन्ना सहित अन्य फसलों में उपयोग कैसे करें, इसको लेकर जानकारी दी. उन्होंने धानुका के अन्य उत्पादों के बारे में जानकारी देते हुए उसके महत्व को लेकर जानकारी दी. किसानों को खेती और उर्वरकों के सही उपयोग के साथ रासायनिक दवाओं में कौन-सी कंपनी की दवा का उपयोग करना है, इसके बारे में पूरी जानकारी किसानों को दी जा रही है.
सातवें चरण में केवीके बिजनौर कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी ने किसानों को मिट्टी की शक्ति कैसे बढ़े, इसको लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान हो सके तो अधिक से अधिक अपने खेतों में ढैंचा की खेती करें. इससे मिट्टी की ताकत बढ़ेगी और किसानों को कम उर्वरक का उपयोग करना पड़ेगा.
आठवें चरण में जिला कृषि अधिकारी बिजनौर डॉ. जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को किसान सम्मान निधि और फार्मर आईडी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि अधिक से अधिक किसान फार्मर आईडी बनवाएं, ताकि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकें.
नौवें चरण में गन्ना विकास विभाग बिजनौर के अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने किसानों को कहा कि किसान अपने उपयोग के लिए सब्जियों की खेती जरूर करें. इसके साथ ही गन्ना में लगने वाले कई रोगों और उसके उपचार के बारे में उन्होंने बताया. इसके साथ ही सरकार की योजना के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी.
दसवें चरण में केवीके बिजनौर वैज्ञानिक डॉ. पिंटू कुमार ने गन्ना में लगने वाले रोगों के बारे में किसानों को विस्तार से जानकारी दी, जिसमें मुख्य रूप से उन्होंने शुगरकेन छोटी बेधक और गन्ने के कंडवा रोग के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विधि से खेती करने का सुझाव किसानों को दिया.
ग्यारहवें चरण में केवीके बिजनौर हेड डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि अगर बिजनौर जिले के किसानों को किसी तरह की खेती में दिक्कत आती है, तो वह हमें जरूर बताएं. हम उनके गांव में कार्यक्रम करके उनकी समस्याओं का हल करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र और यहां के वैज्ञानिक किसानों की मदद कर रहे हैं. अंत में किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और कम रासायनिक उर्वरकों के उपयोग करने का आग्रह भी किया.
बारहवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. साथ ही हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की और आय दोगुनी करने के उपाय बताए.
तेरहवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 20 विजेताओं को 500 रुपये का पुरस्कार दिया गया. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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