मध्यप्रदेश के बालाघाट में मछुआरों की बुनियादी सुविधा के लिए बना फिशयार्डदेश के किसानों और बेरोजगारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार कृषि और पशुपालन को लगातार बढ़ावा देने का प्रयास करती रहती है. वही सरकार के अनेक प्रयासों और प्रयोगों से देश के लोगों में कृषि, पशुपालन और मछली पालन की ओर झुकाव बढ़ा है. इन प्रयासों से अनेक किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ- साथ बेरोजगारों को रोजगार का आधार भी मिला है. पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश सरकार लगातार लोगों को मछली पालन से जोड़ने का प्रयास कर रही है जिसके तहत बालाघाट जिले में मछुआरों की सुविधा के लिए 15 वें वित्त आयोग की राशि और मनरेगा के माध्यम से फिश यार्ड बनाया गया है जिसका नाम निषाद राज भवन रखा गया है.
मध्य प्रदेश राज्य में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है. राज्य सरकार ने इन किसानों और बेरोजगारों को कई तरह की योजनाओं से सशक्त बनाने का प्रयास किया है. मत्स्य पालन विभाग मध्य प्रदेश ने बताया कि मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की जलवायु मछली पालन के लिए अनुकूल है. बालाघाट मछली उत्पाद के लिए राज्य का अग्रणी जिला रहा है. मछली पालन को प्रोत्साहित करने के लिए जिले में मनरेगा मद से 1.21 लाख रुपये और 15वें वित्त की राशि से 1.56 लाख रुपये की मदद से फिशयार्ड का निर्माण कराया गया है. इससे मछुआरों को कई तरह की बुनियादी आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी.
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मछुआरों की बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फिशयार्ड बनाया गया है. इसमें मछुआरों के ठहरने, बैठने और सोने के साथ मछलियों के रखरखाव की उचित व्यवस्था की गई है. मछुआरों की दृष्टिकोण से उन्हें अनेक सुविधाएं मिलेंगी. जैसे मछुआरों को हर रोज घर से जाल ले आने ले जाने में कई तरह की असुविधा होती थी.अब वो उसे इस फिश यार्ड में रख सकते हैं. कई बार मछली पकड़ने के बाद उसे घर नहीं लेकर जा पाने के कारण कई बार मछुआरों को रात भर खुले में रहना पड़ता था, इस फिशयार्ड में उनके ठहरने की उचित व्यवस्था की गई है. अब मछुआरे पूरे दिन काम करने के बाद यहां आराम भी कर सकेंगे. इससे मछली पालन और स्वच्छ मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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