
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को सस्ती और सुलभ कृषि ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण योजना की नई शर्तों को मंजूरी दे दी है.मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऋण वितरण प्रणाली को और अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने का निर्णय लिया गया.
मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के अनुसार अब खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग देय तिथि (ड्यू डेट) निर्धारित नहीं की जाएगी. इसके स्थान पर किसानों को वार्षिक एकल ऋण सीमा (एनुअल सिंगल लिमिट) उपलब्ध कराई जाएगी.इस सीमा के अंतर्गत नगद एवं वस्तु ऋण की अलग-अलग उप-सीमा निर्धारित रहेगी.
वार्षिक ऋण सीमा से पहली बार ऋण आहरण करने की तिथि से 12 माह की अवधि तक ऋण चुकाने का समय मिलेगा. इससे किसानों को ऋण प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा और उन्हें बार-बार ऋण नवीनीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी.
राज्य सरकार द्वारा अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा. इसके अलावा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की पूर्ण अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा.इस व्यवस्था से किसानों को समय पर ऋण चुकाने के लिए प्रेरणा मिलेगी और उन्हें बिना ब्याज के कृषि कार्यों के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकेगी.
प्रदेश में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2012-13 से लगातार संचालित की जा रही है.
योजना के अंतर्गत निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से 3 लाख रुपये तक के अल्पावधि फसल ऋण पर किसी प्रकार का ब्याज नहीं लिया जाता. यह योजना किसानों की खेती की लागत कम करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
इस योजना के संचालन के लिए राज्य शासन प्रत्येक वर्ष बेस रेट और ड्यू डेट का निर्धारण करता है.निर्धारित बेस रेट में से भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली ब्याज सहायता राशि को घटाने के बाद शेष राशि राज्य सरकार ब्याज अनुदान के रूप में वहन करती है.
इसी व्यवस्था के कारण प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण उपलब्ध हो पाता है, जिससे उन्हें खेती के लिए आवश्यक पूंजी समय पर मिलती है और साहूकारी व्यवस्था पर निर्भरता कम होती है.
मंत्रि-परिषद का यह निर्णय प्रदेश के लाखों किसानों के लिए राहत लेकर आया है. वार्षिक एकल ऋण सीमा की व्यवस्था से ऋण प्रक्रिया सरल होगी, जबकि शून्य प्रतिशत ब्याज और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगी. सरकार का मानना है कि इस निर्णय से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.
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