बंगाल के कृषि सेक्टर में होगा बड़ा बदलावपश्चिम बंगाल में खेती-बाड़ी के क्षेत्र में कई बड़े काम होने जा रहे हैं. नई सरकार बनते ही नई योजनाओं की तैयारी तेज हो गई है. इसे लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी हाल में ऐलान किया और बताया कि बंगाल में आने वाले समय में क्या-क्या होने वाला है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी हाल में कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मालदा क्लीन प्लांट फैसिलिटी, सीड हब और चावल-मक्का-ऑर्किड वैल्यू चेन पश्चिम बंगाल में कृषि विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाएंगे.
देश भर में नौ 'क्लीन प्लांट सेंटर' बनाए जाने की राष्ट्रीय घोषणा का जिक्र करते हुए, चौहान ने कहा कि मालदा जैसे फल-समृद्ध क्षेत्रों को 'क्लीन प्लांट नेटवर्क' से जोड़ा जाएगा. प्रस्तावित मालदा क्लीन प्लांट फैसिलिटी आम, लीची और अन्य फलों की फसलों के लिए रोग-मुक्त, हाई क्वालिटी वाले पौधे तैयार करने पर ध्यान लगाएगी. इससे किसानों को बेहतर पौधे मिल सकेंगे, प्रोडक्विटी में सुधार होगा और वे निर्यात-क्वालिटी वाले फलों का उत्पादन कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि 'क्लीन प्लांट प्रोग्राम' के तहत एक आधुनिक नर्सरी इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़ी नर्सरियों के लिए 3 करोड़ रुपये तक और मध्यम आकार की नर्सरियों के लिए 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी, ताकि हर साल लाखों रोग-मुक्त पौधे किसानों तक पहुंच सकें.
केंद्रीय मंत्री ने पोषण, वैल्यू चेन और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों के लिए विशेष परियोजनाओं को मंजूरी देने की घोषणा की. ये पहल पौष्टिक चावल की किस्मों, मक्का के बीज उत्पादन, भंडारण, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर केंद्रित होंगी, जिससे किसानों को बेहतर दाम और ज्यादा स्थिर बाजार मिल सकेंगे. चौहान ने आगे घोषणा की कि पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत के 'सीड हब' के रूप में विकसित किया जाएगा. आलू के बीज, हाइब्रिड मक्का के बीज और अन्य फसलों के बीजों के उत्पादन के लिए राज्य सरकार के साथ पहले ही MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं.
ऑर्किड की खेती और बागवानी के लिए भी परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिससे उपयुक्त कृषि-जलवायु क्षेत्रों के किसान ज्यादा मूल्य वाली फूलों की खेती और बागवानी की ओर बढ़ सकेंगे और अपनी कृषि आय बढ़ा सकेंगे.
चौहान ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालय और कृषि वैज्ञानिक मिलकर पश्चिम बंगाल के लिए एक वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार कर रहे हैं. यह रोडमैप कृषि-जलवायु स्थितियों, मिट्टी की विशेषताओं, पानी की उपलब्धता और स्थानीय संसाधनों के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट फसल योजना की पहचान करेगा. साथ ही कृषि उत्पादकता को अधिकतम करने के लिए उपयुक्त तकनीकों और वैल्यू-चेन मॉडल की सिफारिश करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि चावल अनुसंधान संस्थानों को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (उत्कृष्टता केंद्र) के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि पश्चिम बंगाल चावल, आलू और मक्का जैसी फसलों के मामले में अनुसंधान-आधारित मॉडल के तौर पर उभर सके.
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से सुरक्षा दिलाने के लिए पश्चिम बंगाल के किसानों को बहुत बड़े पैमाने पर 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' के दायरे में लाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की पहुंच अभी सीमित है और घोषणा की कि नाबार्ड (NABARD) और बैंकों के सहयोग से KCC कवरेज बढ़ाने के लिए गांव-स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे, ताकि किसानों को सस्ता संस्थागत लोन मिल सके और साहूकारों पर उनकी निर्भरता कम हो सके. चौहान ने आगे कहा कि 'प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन', 'पीएम धन-धान्य कृषि योजना', 'डिजिटल एग्रीटेक' और पोषण बढ़ाने वाले कार्यक्रमों जैसी पहल पश्चिम बंगाल के कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाएंगी.
चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी ताकि पश्चिम बंगाल की प्रगति में तेजी लाई जा सके और इसे विकास के मामले में भारत के अग्रणी राज्यों में से एक के रूप में उभारा जा सके.
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