
मध्यप्रदेश में पहली बार मछली से तैयार होने वाले वैल्यू एडेड पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स की शुरुआत हुई है.मंडला जिले के सिमरिया गांव के युवा उद्यमी आदित्य कुमार पंद्रे ने मछली पालन को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उसे आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़कर नई पहचान दी है. उनके स्टार्टअप क्लेवर फिश फूड प्राइवेट लिमिटेड में फिश चिप्स, फिश टेंगल, लेमन मसाला फिश, फिश अचार सहित कई रेडी-टू-ईट हेल्दी स्नैक्स तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों की मांग अब मध्यप्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ बिहार के मोतिहारी और बेतिया तक पहुंच चुकी है.
इस पहल से न केवल मछली उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलने लगा है, बल्कि स्थानीय और आदिवासी महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल प्रदेश में मत्स्य आधारित कृषि उद्यमिता का नया उदाहरण बन सकता है.
आदित्य कुमार पंद्रे का स्टार्टअप वर्ष 2025 में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई)-रफ्तार के तहत इंक्यूबेट हुआ. योजना के अंतर्गत उन्हें रिसर्च एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए 5 लाख रुपये की ग्रांट प्राप्त हुई.इसी सहयोग से उन्होंने मछली और प्रॉन आधारित ऐसे उत्पाद विकसित किए, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी हैं.
इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें पाम ऑयल, कृत्रिम रंग और प्रिजर्वेटिव का उपयोग नहीं किया जाता, जबकि ये प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं.आधुनिक तकनीक के कारण इनकी शेल्फ लाइफ लगभग छह महीने तक रहती है.
मत्स्य विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर आदित्य वर्ष 2017 से मत्स्य पालन क्षेत्र में किसानों के साथ काम कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि उत्पादन के बाद उचित बाजार और कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता. कई बार मछली खराब होने से नुकसान भी उठाना पड़ता है.
इसी समस्या का समाधान खोजते हुए उन्होंने मछली का वैल्यू एडिशन शुरू किया.इससे मछली लंबे समय तक सुरक्षित रहने लगी और किसानों के लिए नए बाजारों के द्वार खुल गए.अब उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ आय बढ़ाने का अवसर भी मिल रहा है.
स्टार्टअप स्थानीय और आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन प्रक्रिया से जोड़ रहा है. महिलाएं विभिन्न फिश और प्रॉन उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित हुए हैं.
इसके अलावा कंपनी कई नए वैल्यू एडेड उत्पादों पर भी शोध कर रही है.
आदित्य ने बताया कि अब तक रिसर्च, ट्रेडमार्क, लैब वैलिडेशन, कंपनी रजिस्ट्रेशन, मशीनरी और मार्केटिंग सहित विभिन्न कार्यों पर करीब 8 लाख रुपये का निवेश किया जा चुका है. अब अगले चरण में बड़े स्तर पर उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नए राज्यों तक बाजार का विस्तार किया जा सके.
आदित्य कुमार पंद्रे को उनके नवाचार के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं.वर्ष 2023 में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर द्वारा आयोजित फिश वेटरिनरी समिट में बेस्ट एंटरप्रेन्योर अवार्ड से सम्मानित किया गया.इसके अलावा संभाग स्तरीय मिलेट्स फेस्टिवल एवं मेले में फिश एवं प्रॉन आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों के लिए उनकी कंपनी को प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त हुआ.
मंडला के इस युवा उद्यमी की पहल यह साबित करती है कि यदि कृषि और मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक, फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़ा जाए तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं.आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के सहयोग से शुरू हुआ यह स्टार्टअप प्रदेश में मत्स्य आधारित उद्यमिता का सफल मॉडल बनकर उभर रहा है.
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