किसानों को मिलेगी 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद, 100% खरीद की गारंटी...सरकार ने चलाया ये बड़ा अभियान

किसानों को मिलेगी 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद, 100% खरीद की गारंटी...सरकार ने चलाया ये बड़ा अभियान

राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025–31) के तहत किसानों को दलहन की खेती के लिए 10,000 रुपये/हेक्टेयर की सहायता और मुफ्त बीज किट मिलेंगे. PM-AASHA के तहत तूर, उड़द और मसूर की 100% खरीद की गारंटी दी जा रही है.

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किसानों को मिलेगी 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद, 100% खरीद की गारंटी...सरकार ने चलाया ये बड़ा अभियानदालों में आत्मनिर्भर बनेगा देश

भारत को दलहन (दालों) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' (2025–31) के तहत एक पूरे देश में महाअभियान की शुरुआत की है. इस मिशन के तहत किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग के साथ-साथ 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक मदद दी जाएगी. सरकार का मकसद जानकारी और तकनीक के तालमेल से खेती को अधिक मुनाफा देने वाला काम बनाना है.

35 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती

मिशन के तहत देश में दालों के रकबे को बढ़ाने के लिए एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है. इसके अंतर्गत चावल की कटाई के बाद खाली बची जमीनों (राइस फैलो) और अन्य उपयुक्त जमीन का सर्वे कर 35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में दलहन की खेती को बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) और फसल विविधीकरण को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा.

मुफ्त मिलेंगे 88 लाख बीज किट

इस मिशन का मुख्य आधार उन्नत और जलवायु-अनुकूल बीजों को तैयार करना है. सरकार का लक्ष्य कीट-प्रतिरोधी और उच्च उपज देने वाली किस्मों को किसानों तक पहुंचाना है. योजना के तहत 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का उत्पादन और बांटा जाएगा. किसानों को मुफ्त में 88 लाख उन्नत बीज किट उपलब्ध कराए जाएंगे. बीजों की क्वालिटी बनाए रखने के लिए 'साथी' (SATHI) पोर्टल (seedtrace.gov.in) के जरिए पूरी निगरानी रखी जाएगी.

PM-AASHA के तहत 100% खरीद की गारंटी

किसानों को दाम में बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सरकार ने PM-AASHA योजना के तहत दलहन फसलों की खरीद व्यवस्था को बेहद मजबूत कर दिया है. इसके लिए तूर (अरहर), उड़द और मसूर जैसी मुख्य दालों की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी. अगले चार साल तक नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी नोडल एजेंसियां किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी फसल की खरीद करेंगी, जिससे किसानों को समय पर और सही दाम मिलना तय होगा.

नुकसान रोकने के लिए लगेंगे 1,000 प्रोसेसिंग यूनिट

दालों की बर्बादी रोकने और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए मिशन के तहत पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. देश भर में 1,000 दाल प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट (Processing and Packaging Units) लगाई जाएंगी. इन यूनिटों को बनाने के लिए सरकार की ओर से प्रति यूनिट 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी.

2030-31 तक के बड़े लक्ष्य

नीति आयोग की सिफारिशों को देखते हुए सरकार ने भविष्य के लिए कुछ लक्ष्य तय किए हैं जिनमें रकबा विस्तार के तहत दलहन खेती के दायरे को बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर तक ले जाना, उत्पादन लक्ष्य में देश में दालों के कुल उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और पैदावार में सुधार के लिए प्रति हेक्टेयर पैदावार (Yield) को बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना शामिल है. 

सरकार का कहना है कि इस मिशन से न केवल देश की विदेशी करेंसी का भंडार बचेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत में सुधार होगा और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

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