प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)हरियाणा में फसल बीमा योजना को लेकर नया विवाद सामने आया है. दरअसल, सिरसा से कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया है कि राज्य में मृत किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से फसल बीमा क्लेम पास किए गए. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. एक बयान में कुमारी शैलजा ने कहा कि अगर यह मामला सही है, तो यह किसानों और सरकारी व्यवस्था दोनों के साथ बड़ा धोखा है. उन्होंने कहा कि किसानों की सुरक्षा के लिए बनाई गई योजना का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है, जो बेहद गंभीर है.
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि हिसार जिले में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के कुछ ऑपरेटरों, गांव के राजस्व प्रतिनिधियों, बीमा एजेंटों और कृषि विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मृत किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये के फसल बीमा क्लेम प्रोसेस किए गए हैं. उन्होंने कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर मृत किसानों को जीवित लाभार्थी दिखाया गया है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी विफलता है. उनके मुताबिक, इस तरह की घटना सरकारी निगरानी और रिकॉर्ड सिस्टम पर भी सवाल खड़े करती है.
कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि यह मामला राज्य में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग से जुड़ी गड़बड़ियों, धान खरीद और भुगतान में गड़बड़ियों, अलग-अलग विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों से जुड़े कई मामले भी सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत, बदलते मौसम और कम होती आय जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में यदि फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण योजना में भी कथित फर्जीवाड़ा होता है, तो यह किसानों के साथ बड़ा अन्याय है.
कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह की गड़बड़ियां हुई हैं, तो वे इतने वर्षों तक बिना पकड़े कैसे चलती रहीं. उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, चाहे वे अधिकारी हों, सीएससी ऑपरेटर, बीमा एजेंट या अन्य संबंधित लोग, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही कुमारी शैलजा ने पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में किए गए सभी फसल बीमा क्लेम का विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की. उनका कहना है कि इससे यह पता चल सकेगा कि कहीं राज्य के अन्य जिलों में भी इस तरह की कथित फर्जीवाड़ा तो नहीं हुई. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ बयान देने के बजाय जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि किसानों का भरोसा सरकारी योजनाओं पर बना रहे. (PTI)
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