जबलपुर के सिलाइया गांव की 90 आदिवासी महिलाओं ने नाबार्ड के सहयोग से बांस शिल्प को स्वरोजगार का सफल माध्यम बना लिया है. 10 लाख रुपये की सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के चलते ये महिलाएं अब आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं.
विदिशा में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है.कृषिका ऐप और जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से किसान अब घर बैठे डिजिटल आवेदन कर सकेंगे. ग्राम पंचायतों में शिविर लगाकर किसानों को ऑनलाइन KCC प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है.
मध्यप्रदेश में पिछले चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है.प्रदेश अब देश में सब्जी उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. किसान कल्याण वर्ष 2026 के तहत सरकार 54 हजार हेक्टेयर में सब्जी क्षेत्र विस्तार कर किसानों की आय बढ़ाने और उद्यानिकी को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है.
खरीफ सीजन 2026 में मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू कर दी है। अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए पहले ऑनलाइन ई-टोकन बुक करना होगा। फार्मर आईडी अनिवार्य होने से बिना आईडी वाले किसानों को खाद मिलने में परेशानी हो सकती है।
मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद ने कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5% करने का बड़ा फैसला लिया है. इससे कपास व्यापार, जिनिंग उद्योग और किसानों को लाभ मिलेगा. साथ ही किसान कल्याण, मेट्रो, आईटी और अधोसंरचना विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 13,800 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गई है
मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, उच्च मूल्य वाली फसलों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की गई है। इंदौर संभाग की समीक्षा बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, फसल बीमा, नरवाई प्रबंधन और किसानों को समय पर कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए
आगर-मालवा की मेघा पाटीदार ने नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ लेकर अपनी पहचान ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में बनाई है. निःशुल्क ड्रोन और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे किसानों के खेतों में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं.
मंदसौर के किसान राजेश आर्य ने 1.50 लाख रुपये के अनुदान से स्ट्रॉ रीपर खरीदकर नरवाई को कमाई का साधन बना दिया है. वे फसल अवशेषों से भूसा तैयार कर किसानों की मदद कर रहे हैं, अतिरिक्त गेहूं लौटाते हैं और नरवाई जलाने की समस्या का पर्यावरण अनुकूल समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today