मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 अक्टूबर को बैतूल में 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 30 करोड़ रुपये से अधिक की बोनस राशि अंतरित करेंगे. ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ से अधिक का काष्ठ लाभांश मिलेगा.
सीहोर की महिला किसान सीमा मेहता ने गेहूं की पारंपरिक खेती छोड़कर 4,000 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस के जरिए जरबेरा फूलों की खेती शुरू की। सरकार से ₹16.88 लाख का अनुदान लेकर उन्होंने आधुनिक खेती अपनाई.अब सालाना 3.60 लाख फूलों का उत्पादन कर ₹25.20 लाख की आय और ₹11.60 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं.
मध्य प्रदेश में गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना को मंजूरी मिल गई है. योजना के तहत सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को 1 लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये तक के पुरस्कार दिए जाएंगे. प्रदेश के 313 विकासखंडों में प्रतियोगिताएं आयोजित करने, गिर-साहीवाल जैसी देशी नस्लों को बढ़ावा देने और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के किसान ओमप्रकाश पवार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाकर शिमला मिर्च की खेती से शानदार कमाई की है.3.5 एकड़ में करीब 8 टन उत्पादन से उन्हें 16 लाख रुपये की आय और खर्च घटाने के बाद लगभग 9.75 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला.
मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए बड़ी राहत! भावांतर योजना के तहत खरीफ 2026 की फसल के पंजीयन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 24 अक्टूबर 2026 कर दी गई है.पहले रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर थी.
MP Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना लागू करने और 17 अक्टूबर तक पंजीयन कराने का फैसला लिया गया.
मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम एक बार फिर अटक गया है. पटवारी संघ ने साफ कहा है कि निलंबित और बर्खास्त किए गए 4 हजार से अधिक पटवारियों की बहाली के आदेश जारी होने तक वे योजना के तहत रजिस्ट्रियां नहीं करेंगे. संघ का कहना है कि कानूनी संरक्षण संबंधी आदेश जारी होने के बावजूद जिला स्तर पर बहाली की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है.
मध्य प्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं. CM डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, 9 अक्टूबर तक प्रदेश के 55 में से करीब 43 जिलों में महोत्सव हो चुके हैं.जानिए कैसे नई कृषि तकनीक, आधुनिक यंत्र और विशेषज्ञों की सलाह किसानों की समृद्धि का रास्ता खोल सकते हैं.
सिवनी की महिला उद्यमी ज्योति ठाकुर ने PMFME योजना की मदद से ‘जेके फूड’ नाम से खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की.9.55 लाख रुपये के ऋण और 3.34 लाख रुपये की अनुदान राशि से शुरू हुए कारोबार में केले और आलू के चिप्स के बाद अब नमकीन भी तैयार किए जा रहे हैं.
बालाघाट के सुरेंद्र जैतवार ने RAD योजना का लाभ लेकर खेती को विविधीकृत कृषि मॉडल में बदला. एक ही खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, फलोद्यान, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं. खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे भी लगाए गए हैं.
बड़वानी की प्रमिला पाटीदार ने ₹3.5 करोड़ के निवेश से गंगा कावेरी इंडस्ट्रीज शुरू की.एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत 48% तक अनुदान मिला. कॉर्न फ्लेक्स उत्पादन से 20–25 लोगों को रोजगार और स्थानीय मक्का किसानों को बाजार मिला.
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में अरहर फसल प्रदर्शनों का निरीक्षण किया गया.जिले में अरहर का रकबा पिछले वर्ष के 4,000 हेक्टेयर से बढ़कर 12,300 हेक्टेयर पहुंच गया है. अधिकारियों ने किसानों को उन्नत तकनीक, MSP पर खरीदी और कृषि मैपर एप पर पंजीयन की जानकारी दी.
जबलपुर की दीपिका जाट ने 2024 में घर से ‘बृजवासी ऑयल’ के नाम से कोल्ड प्रेस्ड ऑयल का कारोबार शुरू किया.मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से ₹6.80 लाख का ऋण लेकर शुरू हुआ यह कारोबार अब सालाना ₹10–12 लाख तक पहुंच गया है.
भोपाल के रतुआ रतनपुर गांव के किसान भाई हेमंत और ओम कुशवाह ने महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत की थी. आज उनकी आधुनिक नर्सरी में हर महीने करीब 15 लाख फूल और सब्जियों के पौधे तैयार हो रहे हैं. महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली व राजस्थान तक पौधों की सप्लाई कर रहे हैं.
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