झारखंड में कृषि उपकरणों पर मिलेगा 80 फीसगी अनुदान झारखंड में चंपई सोरेन की सरकार ने राज्य के किसानों को राहत पहुंचाते हए एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार के नए फसैले के मुताबिक अब राज्य नें कृषि उपकरणों की खरीद पर किसानों को 80 प्रतिशक की सब्सिडी दी जाएगी. यह सब्सिडी पहले 50 प्रतिशत थी. इस तरह से राज्य में कृषि उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी बढ़ा दी गई है. इसका लाभ राज्य के अधिक से अधिक किसान ले सकेंगे. साथ ही वैसे किसान जो पैसों की कमी के कारण आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे, वो भी सब्सिडी का लाभ उठाते हुए इन कृषि उपकरणों को खरीद सकेंगे और इनका लाभ उठा सकेंगे.
झारखंड कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लग गई है. इसमें यह फैसला लिया गया कि कृषि उपकरणों की खरीद पर किसानों के लिए 80 सब्सिडी दी जाएगी. माना जा रहा है कि कृषि उपकरणों के लिए पर्याप्त सब्सिडी से झारखंड में कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जिससे किसानों के लिए परिचालन लागत में काफी कमी आएगी.किसानों के लिए लागत में कमी आने से उनकी कमाई बढ़ेगी साथ ही आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से किसानों की आय़ बढ़ेगी. इस तरह से राज्य के किसानों को इस योजना से काफी लाभ मिलने वाला है.
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कैबिनट की बैठक में कुल 40 प्रस्ताओं पर मुहर लगाई गई. इसमें कृषि से संबंधित और भी फैसले लिए गए. इसके तहत सरायकेला-खरसावां जिलान्तर्गत खरकई बराज के दांयी तरफ के कमांड क्षेत्र के दक्षिणी भू-भाग में राजनगर प्रखण्ड अवस्थित ऊंचे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के निमित्त भीमखंडा माईक्रो लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए 76.6554 करोड़ (रुपये छिहत्तर करोड़ पैसठ लाख चौवन हजार) रुपए की स्वीकृति दी गई है. इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलेगी, साथ ही इलाके में अच्छी खेती होने से किसानों की आय बढ़ेगी. सिंचाई की सुविधा ना होना इस क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी समस्या थी.
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गौरतलब है कि कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन झारखंड के तहत पहले राज्य के किसानों को कृषि उपकरणों और ट्रैक्टर की खरीद पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती थी. इस योजना का लाभ सभी जिलों के किसान, किसान समूह, महिला स्वयं सहायता समूह, जल पंचायत, जलछाजन समितियां, लैंपस और अन्य कृषि संगठन को दिया जाता था.इसके तहत एक ट्रैक्टर के साथ दो कृषि यंत्र दिए जाते थे. इस योजना का लाभ देने कि लिए उन्हें प्राथमिकता दी जाती थी जिनके पास 10 एकड़ या उससे अधिक जमीन होती थी और जिन समूहों के पास ट्रैक्टर चलाने का लाइसेंस होता था.
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