PM-KISAN में सभी किसानों को जोड़ने की तैयारी, बंद होगी ‘कृषक बंधु’ योजना?

PM-KISAN में सभी किसानों को जोड़ने की तैयारी, बंद होगी ‘कृषक बंधु’ योजना?

पश्चिम बंगाल में किसान योजनाओं को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी सरकार ‘कृषक बंधु’ योजना को बंद कर सभी पात्र किसानों को केंद्र की PM-किसान योजना में शामिल करने पर विचार कर रही है. अधिकारियों ने लाभार्थियों की संख्या में गड़बड़ी की जांच शुरू कर दी है, जबकि इस मुद्दे पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. जानें इस फैसले के पीछे की वजह, आंकड़े और किसानों पर इसका संभावित असर.

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PM-KISAN में सभी किसानों को जोड़ने की तैयारी, बंद होगी ‘कृषक बंधु’ योजना?पीएम किसान स्कीम से जुड़ेंगे बंगाल के सभी किसान

बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ममता बनर्जी सरकार की शुरू की गई 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर सकती है और सभी पात्र लाभार्थियों को केंद्र से फंड मिलने वाली PM-किसान योजना में शामिल कर सकती है. सूत्रों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई.

गुरुवार को नबान्न में कृषि मंत्री दूध कुमार मंडल ने कहा, "मैंने विभाग के अधिकारियों से 'कृषक बंधु' योजना के लाभार्थियों की सूची की जांच करने को कहा है. शक है कि किसानों के लिए बनी इस योजना का लाभ कई ऐसे लोगों को मिल रहा था जो इसके पात्र नहीं थे या जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है. हम सभी पात्र लाभार्थियों को PM-किसान योजना में शामिल करेंगे."

क्या है कृषक बंधु योजना

'कृषक बंधु' योजना के तहत, जिन किसानों के पास एक या उससे ज्यादा एकड़ जमीन थी, उन्हें सालाना 10,000 रुपये मिलते थे और जिनके पास एक एकड़ से कम जमीन थी, उन्हें साल में कम से कम 4,000 रुपये मिलते थे. इस योजना को चलाने में राज्य सरकार हर साल लगभग 8,000 रुपये करोड़ खर्च कर रही थी, क्योंकि इसमें 1.14 करोड़ लाभार्थी रजिस्टर्ड थे.

'दि टेलीग्राफ' ने एक रिपोर्ट में लिखा है, पिछली कृषि जनगणना के अनुसार राज्य में लगभग 72 लाख किसान थे. ऐसे में प्रशासन के कई लोगों ने सवाल उठाया कि लाभार्थियों की संख्या कुल किसानों की संख्या से ज्यादा कैसे हो गई, जबकि यह योजना मुख्य रूप से उन किसानों की मदद के लिए शुरू की गई थी जिनके पास खेती के लिए अपनी जमीन थी.

पीएम किसान स्कीम से सरकार को फायदा

सूत्रों का कहना है कि अगर 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया जाए और पात्र किसानों को PM-किसान योजना में शामिल कर लिया जाए, तो राज्य पर से भारी वित्तीय बोझ हट जाएगा. एक सूत्र ने कहा, "राज्य इन योजनाओं को चलाने में हर साल 8,000 करोड़ से ज्यादा खर्च करता है. अगर PM-किसान योजना पूरी तरह से इसकी जगह ले लेती है, तो राज्य को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ेगा क्योंकि इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है."

बंगाल में पीएम किसान स्कीम पूरी तरह से लागू नहीं है और हर किसान इस योजना का लाभार्थी नहीं है. बीजेपी सरकार ममता बनर्जी पर अक्सर आरोप लगाती रही है कि केंद्र से विरोध के चलते बंगाल के किसानों को पीएम किसान जैसी योजना से वंचित रखा गया है. बीजेपी का आरोप है कि ममता सरकार ने शुरू की 9 किस्तों से किसानों को वंचित रखा और बाद में यह योजना लागू भी की गई तो फंडों के बंटवारे में बंदरबांट किया गया. 

पीएम किसान पर बंगाल-केंद्र सरकार में विवाद

इस योजना को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच हमेशा जुबानी जंग चलती रही है. बीजेपी का आरोप है कि केंद्र से फंड आने के बाद भी ममता सरकार उसे लाभार्थियों को लाभ नहीं देती, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप था कि केंद्र सरकार पीएम किसान की पूरी राशि नहीं देती. 

पश्चिम बंगाल में PM-किसान योजना को वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू किया गया था और तब से लाखों किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ मिला है. एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक, साल 2022-23 में 48,69,285 लाभार्थियों को 2839.1 करोड़ रुपये बांटे गए जबकि 2023-24 में 46,92,922 किसानों को 1913.09 करोड़ रुपये की किस्त जारी की गई. PM-KISAN योजना का मकसद सिर्फ देश भर के उन किसान परिवारों को आर्थिक मदद देना है जिनके पास जमीन है. PM-KISAN योजना के साथ विकास का कोई और काम नहीं जुड़ा है.

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