Shimla में सरकार ने ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे आवारा और बेसहारा मवेशियों की देखभाल और किसानों को फसल नुकसान से राहत मिल सके.
प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है. मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों का पूरा डेटा पोर्टल से जोड़ा जाए और उनकी फसलों की खरीद और ब्रांडिंग को और मजबूत किया जाए. हमीरपुर में होने वाला सम्मेलन कई संकेत देता है.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि औद्योगिक हेम्प से दवा, टेक्सटाइल, पैकेजिंग और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में निवेश बढ़ेगा. यह फसल कम पानी में उगती है और जंगली जानवरों से कम प्रभावित होती है, जिससे खेती और रोजगार दोनों को फायदा होगा.
Himchal Pradesh Natural Farming: हिमाचल प्रदेश सरकार 9.61 लाख परिवारों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इससे किसानों की लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और ग्रामीण आय बढ़ेगी. जानिए पूरा प्लान...
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और लैंड स्लाइड का दौरा जारी है जिससे राज्य को हजारों करोड़ों का नुकसान हुआ है. इसके मद्दनेजर, सरकार ने अब आपदाग्रस्त राज्य में मनरेगा के नियमों में ढील देते हुए इसके सालाना मानव दिवस 100 से बढ़ाकर 150 कर दिए हैं.
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय दूध उत्पादकों को बल्क मिल्क कूलर चलाने का काम सौंपा जाएगा और इसके लिए उन्हें कमीशन दिया जाएगा. वहीं, आनी क्षेत्र में तकनीकी समस्या के कारण बर्बाद हुए दूध पर विधानसभा में चर्चा हुई, जिसमें बताया गया कि 21 उत्पादकों को 77,000 रुपये का नुकसान हुआ.
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लगातार बारिश और बाढ़ से तबाह हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए केंद्र से विशेष राहत पैकेज और वन कानून में ढील की मांग की है. सुक्खू ने पत्रकारों से कहा कि प्रदेश की करीब 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है और वर्तमान कानून के तहत राज्य सरकार इसका उपयोग नहीं कर सकती.
हिमाचल में प्राकृतिक खेती शुरू करने पर किसानों को बढ़िया सब्सिडी मिल रही है. जिसके चलते किसान इसे अपना रहे हैं. हाल ही में दो जिलों से किसानों के प्राृतिक खेती से जुड़ने के आंकड़े सामने आए हैं, 37,000 किसानों ने फायदे के चलते प्राकृतिक खेती अपनाई है. पढ़ें डिटेल...
हिमाचल कैबिनेट ने दूध और फल उत्पादकों के हित में बड़े फैसले लिए हैं. 2025 की एमआईएस योजना में सेब, संतरा, माल्टा, आम आदि की 12 रु./किग्रा दर से खरीद तय की गई है. साथ ही चार नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को भी मंजूरी दी गई है.
Himachal Pradesh News: हिमाचल में सुप्रीम कोर्ट की रोक से सेब पेड़ों की कटाई पर किसानोंब को बड़ी राहत मिली है. वहीं, सीएम सुक्खू ने सेब उत्पादकों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया और बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से आपदा पीड़ित भूमिहीनों को जमीन देने की अनुमति मांगी है.
Himachal Cabinet Decision: हिमाचल कैबिनेट ने किसानों-बागवानों और पशुपालकों को राहत देते हुए मुआवजा राशि में बड़ा इजाफा किया है. अब खेत, फसल, पॉलीहाउस और दुधारू पशुओं के नुकसान पर ज्यादा मुआवजा मिलेगा. खेत से गाद हटाने पर भी अब 6,000 रु. प्रति बीघा तक की मदद दी जाएगी.
हिमाचल सरकार ने दूध उत्पादकों को राहत देते हुए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दोगुनी कर दी. कामधेनु सोसाइटी ने इस फैसले को लेकर सीएम का आभार जताया और कहा कि हिमाचल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देने वाला पहला राज्य है.
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने गौपाल योजना के तहत प्रति मवेशी मासिक प्रोत्साहन राशि 700 से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दी है. यह नई राशि अगस्त 2025 से लागू होगी और सभी रजिस्टर्ड गौ-सदनों को दी जाएगी.
हिमाचल सरकार ने किसानों से खरीफ फसलों की बीमा करवाने को कहा है. इसके लिए जिला प्रशासन ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ में बोई जाने वाली मक्का और धान की फसलों का बीमा कराने को कहा है.
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने बीते दिन हुई बैठक में कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी है. इसमें सबसे पहली मंजूरी पशुपालन विभाग में मल्टी टास्क वर्कर (पशु मित्र) के 1,000 पदों पर भर्तियों को दी गई है. वहीं, एक अन्य फैसले में गौशालाओं में गोवंश चारे की सब्सिडी में भारी बढ़ोतरी की गई है.
हिमाचल प्रदेश में बिजली यूनिट का रेट बढ़ाने के बाद बीजेपी ने रविवार को राज्य की कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. लेकिन, इसके ठीक अगले ही दिन राज्य सरकार ने किसानों के लिए भारी सब्सिडी की घोषणा कर दी. अब किसानों को मात्र 1 रुपये प्रति यूनिट ही बिजली का बिल देना होगा.
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के तहत 154 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषि मशीनीकरण और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती विधियों से उगाई गई हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य भी घोषित किया है.
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने नेचुरल फार्मिंग करने वाले किसानों को बढ़ावा देेने के लिए हिम-उन्नति योजना लॉन्च की है. इस योजन के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जिससे प्रदेश के करीब दो लाख किसानों को फायदा होगा. इस योजना के पीछे सरकार की मंशा छोटे किसानों को संगठित करने की है.
किसान सेब, ख़ुरमा, बेर, नाशपाती और अन्य फलदार पेड़ों की सुरक्षा के अलावा अन्य सब्जियों की उपज को बचाने के लिए एंटी-हेल नेट का उपयोग करते हैं. एंटी-हेल नेट पक्षियों को फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाने से भी बचाता है. कृषि विभाग में योजना के लिए बजट का प्रावधान न होने से किसान चिंतित हैं.
हिमाचल प्रदेश के कृषि सचिव सी पलारासु ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इसकी मदद से प्रदेश में नई फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग इकाइयों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगी. साथ ही किसानों की कमाई भी बढ़ेगी. उन्होंनें कहा कि योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को आगे आना चाहिए.
हिमाचल प्रदेश में 24, 000 हेक्टेयेर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जाती है. इसके साथ ही राज्य में इस तकनीक से 1 लाख 71 हजार किसान खेती कर रहे हैं. राज्य के कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने यह घोषणा की कि इस योजना को अब राज्य में बंद किया जा रहा है.
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