ऑयस्टर मशरूम की खेतीबिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने मशरूम की खेती को कृषि श्रेणी में शामिल कर लिया है. इससे मशरूम की खेती करने वाले किसानों को सस्ती बिजली का लाभ मिल सकेगा. बिहार में पहले की तुलना में अभी बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती हो रही है और हजारों किसान इसमें शामिल हैं. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने गुरुवार को इस फैसले की जानकारी दी.
बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने मशरूम खेती को कृषि श्रेणी (IAS) में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इससे छोटे किसानों को कृषि दरों पर बिजली मिलेगी, जिससे लागत में कमी आएगी. हालांकि, मशरूम प्रोसेसिंग या मैन्युफैक्चरिंग इस दायरे में शामिल नहीं होगी.
अभी हाल में प्रदेश के कृषि मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया था कि बिहार में मशरूम उत्पादन को व्यावसायिक खेती के बदले खेती की श्रेणी में शामिल करने का निर्णय सरकार ने लिया है. इस निर्णय से मशरूम उत्पादक किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध होगी. अब मशरूम किसानों को सामान्य किसानों की तरह ही मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल देना होगा. बिहार सरकार पहले ही अन्य मद में भी मशरूम उत्पादक किसानों को 90 फीसद तक सब्सिडी देती है.
बिहार में मशरूम उगाने वाली इकाइयों को अभी तक कमर्शियल रेट पर बिजली मिलती थी. लेकिन आयोग के ताजा फैसले के बाद बिजली का रेट कृषि नियम के मुताबिक लगेगा. बिजली की नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी जिसमें किसानों को बिजली के रेट में डिस्काउंट मिलेगा. खेती करने वाले किसान जिस रेट पर बिजली लेते हैं और सिंचाई जैसी सुविधाओं का लाभ लेते हैं, कुछ वैसा ही रेट बिहार के मशरूम उगाने वाले किसानों को भी देना होगा. इससे बिजली का बिल बहुत हद तक कम हो जाएगा. बिहार में मुख्य तौर पर ऑयस्टर, बटन, पैडी स्ट्रॉ और मिल्की मशरूम की खेती होती है.
बिहार में लगभग 2.22 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं जिनमें बड़ी संख्या किसानों की भी है. इनमें अच्छी-खासी तादाद मशरूम उगाने वाले किसानों की है. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने गुरुवार के फैसले में बताया कि 2026-27 में बिजली का टैरिफ नहीं बढ़ेगा जिससे 2.22 करोड़ उपभोक्ताओं को फायदा होगा.
इससे पहले बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) ने आयोग से बिजली का टैरिफ बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन आयोग ने वितरण कंपनियों के सभी श्रेणियों में 35 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी, सदस्य परशुराम सिंह यादव और अरुण कुमार सिन्हा की पूर्ण पीठ ने यह टैरिफ आदेश जारी किया. नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी.
आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए टैरिफ को जस का तस रखा गया है. आयोग द्वारा तय टैरिफ में राज्य सरकार की सब्सिडी शामिल नहीं है. सरकार जल्द ही 2026-27 के लिए सब्सिडी का ऐलान कर सकती है.
अभी “मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना” के तहत 1.86 करोड़ उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिल रही है. शहरी उपभोक्ताओं को लगभग 550 रुपये/महीने की बचत और ग्रामीण उपभोक्ताओं को लगभग 306 रुपये/महीने की बचत हो रही है. आयोग ने कहा है कि टैरिफ स्थिर रखने, स्लैब मर्ज करने और चार्ज घटाने जैसे फैसलों से राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, जबकि किसानों और छोटे व्यापारियों को भी राहत पहुंचेगी.(रोहित कुमार सिंह का इनपुट)
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