भदोही पहुंचा ‘किसान तक’ का किसान कारवांकालीन नगरी के नाम से मशहूर भदोही जनपद के विजवा गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान की कवरेज में यह 42वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनसे इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की.
वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी पशुपालन से जुड़ी सरकार की बहुउपयोगी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया. इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती की नई तकनीकों से अवगत कराया और बताया कि नई तकनीक अपनाकर किसान अपनी लागत कम करते हुए उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं.
किसान कारवां के प्रथम चरण में कृषि विज्ञान केंद्र भदोही की महिला वैज्ञानिक डॉ. रेखा सिंह ने बताया कि आज महिलाओं में गैस की समस्या काफी बढ़ रही है. इसके समाधान के लिए उन्होंने अजवाइन और सौंफ का बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर उपयोग करने का तरीका बताया. साथ ही महिलाओं को आम से अचार, मुरब्बा और स्क्वाश बनाकर उसे बाजार में बेचने के तरीके भी सिखाए, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें.
दूसरे चरण में प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रगतिशील किसान ओमकार नाथ उपाध्याय ने बताया कि वह वर्ष 2017 से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इससे पहले वह रासायनिक खेती करते थे, जिसके कारण परिवार के लोग बीमार पड़ने लगे. बाद में उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाई, जिससे उनके उत्पाद का उपयोग करने वाले लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ और उनकी जमीन में कार्बनिक तत्व भी बढ़ गया. उन्होंने प्राकृतिक खेती करने की विधि भी किसानों को बताई.
तीसरे चरण में ‘किसान तक’ के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह ने किसानों को बताया कि यूरिया और डीएपी को लेकर किसानों के बीच कई तरह की गलतफहमियां हैं. उन्होंने बताया कि डीएपी में भी नाइट्रोजन की मात्रा होती है और अधिक मात्रा में यूरिया और डीएपी का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने की गारंटी नहीं है. हर पौधे और मिट्टी की एक निश्चित क्षमता होती है, इसलिए वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार संतुलित उर्वरक का प्रयोग करना जरूरी है.
चौथे चरण में कृषि विभाग के रामनरेश मौर्य ने बताया कि किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है. यदि किसी कारण से कोई किसान लाभ से वंचित रह गया है, तो वह आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर लाभ प्राप्त कर सकता है. उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री के महत्व और उसके लिए जरूरी दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य हो जाएगी.
पांचवें चरण में मौसम वैज्ञानिक KVK, सर्वेश बरनवाल ने किसानों को मौसम आधारित खेती के महत्व के बारे में बताया. किसानों से कहा गया कि मौसम की जानकारी के आधार पर खेती करने से नुकसान कम और लाभ अधिक होता है. इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जारी मौसम बुलेटिन को नियमित रूप से देखने की सलाह दी गई.
छठे चरण में जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सचान ने बताया कि गांव-गांव में पशुओं का टीकाकरण अभियान चल रहा है. उन्होंने पशुओं के टीकाकरण के फायदे बताए और मिनी नंदिनी और नंदिनी योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
सातवें चरण में उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी कुमार सिंह ने कहा कि आज खेती में बदलाव की जरूरत है. पहले ज्यादा उत्पादन जरूरी था, लेकिन अब किसानों की आय का बड़ा हिस्सा बीमारियों पर खर्च हो रहा है. इसलिए रासायनिक खाद का सीमित उपयोग करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है. इससे लागत कम होगी और स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा.
आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष और प्रभारी डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने कहा कि किसानों को जागरूक होने के साथ-साथ अपने ज्ञान का खेती में सही उपयोग करना भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर हजारों किसान अपनी आय बढ़ा रहे हैं और आधुनिक तकनीकों से खेती को समृद्ध बना रहे हैं.
नौवें चरण में जादूगर सलमान ने अपने अनोखे अंदाज में किसानों को जागरूक किया. उन्होंने बताया कि कई किसान जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते. उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री के महत्व और भविष्य में इसके लाभ के बारे में भी बताया.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. वहीं, प्रथम पुरस्कार के रूप में सुलेखा ने 3000 रुपये की नकद राशि जीती, जबकि दूसरे पुरस्कार के रूप में रामकुमार बिन्हा को 2000 रुपये की नकद राशि प्रदान की गई.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today