बलिया के मलप गांव पहुंचा किसान कारवांबलिया के मलप गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के साझा प्रयास से चल रहे इस विशेष अभियान के तहत 75 जिलों की कवरेज में यह 41वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की. इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही अलग-अलग कृषि योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उनसे लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया.
वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेती में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया. वैज्ञानिकों ने कहा कि नई तकनीक अपनाने से खेती की लागत कम की जा सकती है और उत्पादन के साथ किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है. कार्यक्रम में किसानों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और अपनी समस्याएं और अनुभव विशेषज्ञों के साथ साझा किए. किसान कारवां का उद्देश्य किसानों को उन्नत खेती के तरीकों, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है.
किसान कारवां के पहले चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. ऋषिकेश कुमार ने किसानों को सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से लगभग 90 प्रतिशत तक बछिया पैदा होने की संभावना रहती है, जिससे डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा एफएमडी समेत तीन महत्वपूर्ण बीमारियों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिन किसानों के पशुओं का टीकाकरण अभी तक नहीं हुआ है, वे नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर टीकाकरण अवश्य कराएं.
किसान कारवां के दूसरे चरण में पूर्व मंत्री छुट्टू राम ने कहा कि आज किसानों को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है. उन्होंने बताया कि बलिया क्षेत्र में किसानों की आय और उत्पादन दोनों में वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा है.
तीसरे चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. चंद्रमणि मौर्य ने बताया कि सरकार छोटे पशुओं के लिए भी कई योजनाएं चला रही है. बकरी पालन, भेड़ पालन और देसी नस्ल की गाय के पालन पर सब्सिडी जा रही है. साथ ही पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारी थनैला के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने समय-समय पर जागरूकता और टीकाकरण की आवश्यकता बताई.
चौथे चरण में उप कृषि निदेशक मनीष कुमार सिंह ने बताया कि जिले में अब तक तीन लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है. उन्होंने कहा कि लगभग 3.40 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त का लाभ मिलेगा. उन्होंने किसानों से अपील की कि जो किसान अभी तक फार्मर रजिस्ट्री और केवाईसी नहीं कर पाए हैं, वे जल्द इसे पूरा कर लें, अन्यथा भविष्य में उन्हें खाद-बीज और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है.
पांचवें चरण में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने किसानों को धान और गेहूं की उन्नत किस्मों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का उपयोग कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों और किसानों की मेहनत से आज भारत धान उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर नंबर वन बन चुका है.
छठे चरण में भारतीय किसान महासंघ के प्रांत महामंत्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कभी-कभी अधिकारियों की लापरवाही के कारण इनका लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंच पाता. उन्होंने कहा कि किसानों में आज भी इतनी क्षमता है कि वे मिट्टी से सोना उगा सकते हैं.
सातवें चरण में भारतीय किसान महासंघ के प्रांत महामंत्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कभी-कभी अधिकारियों की लापरवाही के कारण इनका लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंच पाता. उन्होंने कहा कि किसानों में आज भी इतनी क्षमता है कि वे मिट्टी से सोना उगा सकते हैं.
आठवें चरण में इफको एमसी के रीजनल मार्केटिंग मैनेजर सतीश कुमार यादव ने बताया कि किसानों का इफको के उत्पादों पर वर्षों से विश्वास रहा है. उन्होंने बताया कि जापान की मित्सुबिशी कॉरपोरेशन के साथ समझौते के बाद इफको एमसी ने कीटनाशकों की नई श्रृंखला बाजार में उतारी है, जो किसानों के लिए भरोसेमंद और निश्चित कीमत पर उपलब्ध है.
नवें चरण में किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह ने किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और उन्नत किस्मों की खेती करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि ‘किसान तक’ एक ऐसा मंच बन चुका है जो किसानों की आवाज को देशभर तक पहुंचा रहा है. उन्होंने किसानों से जागरूक रहकर खेती में तकनीकी का इस्तेमाल करने की अपील की.
दसवें चरण में इफको के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष गुप्ता ने बताया कि मिट्टी में कुल 17 प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं, लेकिन किसान अक्सर केवल कुछ ही तत्वों की पूर्ति करते हैं. उन्होंने किसानों को हर साल अपनी जमीन की मिट्टी की जांच कराने और उसी के अनुसार उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी.
ग्यारहवें चरण में जादूगर सलमान ने इफको के उत्पादों के बारे में रोचक अंदाज में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पारंपरिक यूरिया और डीएपी के अधिक उपयोग से नुकसान भी हो सकता है, जबकि नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग से लागत कम और उत्पादन बेहतर हो सकता है.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में किसानों के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. प्रथम पुरस्कार के रूप में संजू देवी ने 2000 रुपये जीते, जबकि पुष्पा देवी को भी प्रमुख पुरस्कार मिला.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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