PM Kisan की 22वीं किस्त जारी: 9.32 करोड़ किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये ट्रांसफर

PM Kisan की 22वीं किस्त जारी: 9.32 करोड़ किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये ट्रांसफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी से पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी की. इसके तहत देश के 9.32 करोड़ किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की गई है. इस योजना के जरिए किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है.

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PM Kisan की 22वीं किस्त जारी: 9.32 करोड़ किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये ट्रांसफरपीएम किसान की 22वीं किस्त जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी की. पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान निधि की 22वीं किस्त के रूप में, देश भर के 9.32 करोड़ किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चुनावी राज्य असम के गुवाहाटी से यह किस्त जारी की.

प्रधानमंत्री ने कृषि से जुड़ी कई स्कीमों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है. प्रधानमंत्री ने पीएम किसान स्कीम, फसलों की एमएसपी और फसल बीमा योजना का जिक्र किया और किसानों की दी गई मदद राशि का हवाला दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने मुश्किल समय में भी किसानों को खाद की सप्लाई सुनिश्चित की है. उन्होंने कहा कि जब दुनिया में खाद की एक बोरी का दाम 300 रुपये होती है, तब केंद्र सरकार किसानों को 300 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराती है. 

18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर

प्रधानमंत्री ने कहा, थोड़ी देर पहले यहां से 19,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है. असम को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाली परियोजनाओं से लेकर असम आने वाले लोगों की सुविधा के लिए जो काम हुए हैं… ढेर सारे प्रोजेक्ट असम को मिले हैं.

आज देश के किसानों और असम के टी गार्डन में काम करने वाले साथियों के लिए भी बड़ा दिन है. कुछ क्षण पहले पूरे देश में पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हमारे करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में भेजी गई है. इसके अलावा असम के चाय बागानों से जुड़े अनेक परिवारों को आज भूमि के पट्टे भी दिए गए हैं. मैं असम के लोगों को, यहां के सभी परिजनों को और देशभर के सभी किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं.

पीएम मोदी ने कहा, ये वही किसान भाई-बहन हैं, जिनमें से अधिकांश के पास 2014 से पहले न मोबाइल फोन था और न ही बैंक में उनका कोई खाता था. आज ऐसे करोड़ों किसानों के खातों में अब तक सवा चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसे जमा हो चुके हैं.

कांग्रेस पर निशाना

जब PM किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई थी, तो कांग्रेस पार्टी ने यह अफवाह फैलाई थी कि हालांकि प्रधानमंत्री मोदी इस योजना के तहत आर्थिक सहायता दे रहे हैं, लेकिन लाभार्थियों को चुनाव के बाद यह पैसा वापस करना पड़ेगा. वे गलत जानकारी फैलाने में माहिर हो गए हैं. हालांकि, यह योजना देश के सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरी है.

BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार के लिए, किसानों के कल्याण से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. इसके विपरीत, जब किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने की बात आई, तो कांग्रेस लगातार प्रभावी ढंग से काम करने में विफल रही.

MSP में 20 लाख करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा—एनडीए सरकार के लिए किसान हित से बड़ा कुछ भी नहीं है. जब किसानों को पैसे देने की बात आती थी, तो कांग्रेस वालों की सांस अटक जाती थी. 2014 से पहले केंद्र में 10 साल तक कांग्रेस की सरकार थी. कांग्रेस सरकार के 10 साल में किसानों को एमएसपी के रूप में साढ़े छह लाख करोड़ रुपये मिले थे.

जबकि हमारी सरकार के 10 साल में किसानों को एमएसपी के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिल चुके हैं. MSP हो, सस्ता ऋण हो, फसल बीमा हो, पीएम किसान सम्मान निधि हो... ये योजनाएं किसानों का बहुत बड़ा संबल बनी हैं. इतना ही नहीं, हमने इस बात का ध्यान रखा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट का असर खेती-किसानी पर ना पड़े.

यूरिया पर 12 लाख करोड़ खर्च

MSP हो, सस्ता ऋण हो, फसल बीमा हो, पीएम किसान सम्मान निधि हो... ये योजनाएं किसानों का बहुत बड़ा संबल बनी हैं.

इतना ही नहीं, हमने इस बात का ध्यान रखा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट का असर खेती-किसानी पर ना पड़े.

हमने यह सुनिश्चित किया कि वैश्विक संकटों का कृषि क्षेत्र पर कोई असर न पड़े. कोविड महामारी और उसके बाद हुए युद्धों के चलते, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें आसमान छूने लगीं, जिससे इनकी भारी कमी हो गई. इन चुनौतियों के बावजूद, केंद्र सरकार ने भारत में किसी भी संकट को टालने के लिए हर संभव प्रयास किया. जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की एक बोरी की कीमत 3,000 रुपये थी, वहीं हमारी सरकार ने इसे किसानों को मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराया. इसे संभव बनाने के लिए, सरकार ने सब्सिडी के रूप में 12 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च किए.

किसानों की खेती नई तकनीक से जुड़े, उन्हें सिंचाई के नए तरीकों से जोड़ा जाए और फसलों को भी लाभ मिले, इसी मंशा से हमारी सरकार ने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ की नीति बनाई. ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीक को किसानों तक पहुंचाया गया. 

आज सरकार आपके खेतों को सोलर पंप से जोड़ने के लिए काम कर रही है और हमारी कोशिश है कि डीजल पर आपका खर्च कम से कम हो. हमने आजाद भारत में बार-बार देखा है कि जब दुनिया के दूसरे हिस्सों में लड़ाइयां होती हैं और सप्लाई चेन में दिक्कत आती है, तो परेशानी हमारे किसानों को होती है.

कभी खाद महंगी हो जाती थी, कभी डीजल और ऊर्जा की कीमत बढ़ जाती थी, क्योंकि दशकों तक कांग्रेस पार्टी ने देश को दूसरे देशों पर निर्भर रखा. इससे खेती की लागत बढ़ जाती थी.

कृषि संकटों से किसानों को बचाया

पीएम मोदी ने कहा, बीते दशक में भाजपा—एनडीए सरकार ने आत्मनिर्भरता को लेकर एक और बड़ा काम किया है. हमने कृषि को बाहरी संकटों से बचाने के लिए आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन दिया है.

खेती-बाड़ी में आधुनिक टेक्नोलॉजी को शामिल करने और किसानों को सिंचाई के नए तरीकों से परिचित कराने के लक्ष्य के साथ, हमने "हर बूंद, अधिक फसल" नीति लागू की. ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकें शुरू की गईं, जिनसे न केवल पानी का बेहतर इस्तेमाल हुआ, बल्कि कुल लागत भी कम हुई.

आज, हम सोलर पंपों के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर आपकी खेती को और अधिक सहयोग देने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे डीजल पर निर्भरता कम हो सके. केंद्र सरकार की 'कुसुम योजना' इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है.

देश के हर क्षेत्र, हर वर्ग का विकास हमारी प्राथमिकता है. इसी भाव के साथ आज असम के टी-गार्डन में काम करने वाले साथियों के लिए बहुत बड़ी पहल हुई है.

जिनकी मेहनत से असम की वैश्विक पहचान को बल मिला, जिनकी उगाई चाय की खुशबू से दुनियाभर में भारत की पहचान बनी, आज उन साथियों को भाजपा—एनडीए सरकार सम्मान भी दे रही है और सहायता भी दे रही है.

कांग्रेस की सरकारों ने इन्हें पूछा तक नहीं, इनके पास जमीन के कानूनी दस्तावेज तक नहीं थे. आज असम की भाजपा सरकार इस ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने का काम कर रही है. अब इन परिवारों को अपनी जमीन मिली है और पक्के घर मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है.

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