शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) के ऐसे मॉडल तैयार करने पर काम कर रही है, जो छोटे किसानों के लिए भी फायदेमंद होंगे. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे चौहान ने यह भी बताया कि किसानों से कई फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जा रही हैं. मंत्री लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे.
चौहान ने कहा कि सरकार ने एकीकृत खेती के ऐसे मॉडल तैयार करने पर काम शुरू कर दिया है, जो छोटे किसानों के लिए भी मददगार होंगे, क्योंकि देश में किसानों के पास जमीन का रकबा कम है. आमतौर पर, एकीकृत खेती के मॉडल का मतलब है अलग-अलग चीजों, जैसे फसलों और पशुधन को एक साथ लाना.
इस बीच, सरकार तंबाकू किसानों के लिए वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठा रही है. चौहान ने बताया कि तंबाकू की खेती के विकल्प के तौर पर गन्ने और दूसरी फसलों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, तंबाकू के स्थान पर कौन-कौन सी फसलें पैदा की जा सकती हैं, किस-किस इलाके में, वो भी चिन्हित करने का काम किया है. FCV तंबाकू की जगह हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, मक्का, आलू, चिया, मक्का, फील्ड बीन, लोबिया, रागी, रेड ग्राम, रागी-रेड ग्राम, मूंगफली, वैसे ही बीड़ी तंबाकू की जगह गन्ना, सोयाबीन, सोयाबीन-ज्वार, मूंगफली-ज्वार और उसके साथ-साथ अलग-अलग प्रकार की कौन सी फसलें हो सकती हैं, वो भी हमने विकल्प सुझाए हैं.
कृषि मंत्री ने कहा, किसानों को उनकी उपज का उचित दाम देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर हम फसलों की खरीद करते हैं. इस साल भी गेहूं हो, धान हो या दलहन की फसलें हों, तिलहन की फसलें हों, सबका MSP बढ़ाया गया है. न केवल MSP बढ़ाया है, बल्कि फसलों की MSP के साथ फसलों की ऐतिहासिक खरीदी जारी है.
उन्होंने कहा, पहले फसल बीमा योजना में किसान के खाते में कई महीनों तक भुगतान नहीं होता था. और कई बार जब तक पूरी तहसील में नुकसान न हो जाए, तब तक नुकसान की भरपाई नहीं की जाती थी. हमने फसल बीमा योजना के सभी नियमों में संशोधन किया और यह तय किया कि अगर एक भी किसान का नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी को उस नुकसान का मुआवजा देना होगा. स्थानीय आपदाओं को शामिल करने का काम मोदी सरकार ने किया है.
हमने यह प्रावधान भी किया है. बीमा कंपनियां किसान के खाते में क्लेम ट्रांसफर करने में देरी करती है, तो किसान को 12% ब्याज की राशि देनी होगी.
'हमने राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पिछले तीन साल में 9,930 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान 2 करोड़ 50 लाख किसानों के खाते में जमा करवाया है.' हम लगातार कृषि रक्षक पोर्टल और बाकी माध्यमों से यह ध्यान रखते हैं कि कहीं कोई गड़बड़ न हो. और हमने तय किया है कि कहीं भी गड़बड़ हो, तो किसान सीधे कॉल करें.
'कृषि रक्षक पोर्टल में 2,71,708 शिकायतें दर्ज की गई हैं. उन शिकायतों की हम जांच करते हैं, और जांच करने पर अगर कहीं गड़बड़ पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई करते हैं. किसी को, गड़बड़ करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा, यह आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार है.'
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