बिहार में मखाना की खेती को मिलेगी रफ्तारबिहार सरकार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों, ग्रामीण विकास, सिंचाई, बाढ़ प्रबंधन और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी. बैठक में कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगाई गई, जिनमें कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया गया.
सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में बिहार मखाना विकास योजना को मिली मंजूरी शामिल है. राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 89.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. योजना के तहत मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने, क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराने, किसानों को प्रशिक्षण देने और प्रोसेसिंग सुविधाओं का विकास किया जाएगा. साथ ही मखाना की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, निर्यात और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था को भी मजबूत बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे किसानों, व्यापारियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की आय में बड़ी वृद्धि होगी.
कैबिनेट ने गया स्थित विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विष्णुपद मंदिर परिक्षेत्र के विकास हेतु 2520 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
बिहार सरकार ने बाढ़ और सिंचाई से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए भी बड़ा कदम उठाया है. जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि से 1000 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देने की मंजूरी दी गई है. इस राशि का उपयोग बाढ़ सुरक्षा कार्यों, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और संरक्षण संबंधी कार्यों, सिंचाई परियोजनाओं, जल-जीवन-हरियाली अभियान और प्रगति यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्यों में किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे राज्य में जल प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.
कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) योजना के तहत 2 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है. इस योजना के माध्यम से बिहार में ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ तिलहन उत्पादन की ओर आकर्षित करना है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ सके और देश खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े.
ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी 38 जिलों में 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ लागू करने को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा दी जाएगी. योजना में प्रावधान किया गया है कि यदि किसी परिवार का वयस्क सदस्य काम की मांग करता है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा.
सरकार का दावा है कि यह योजना न केवल ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को भी गति देगी. इससे पलायन कम करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर बिहार कैबिनेट के इन फैसलों में कृषि, किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, बाढ़ सुरक्षा और धार्मिक पर्यटन को केंद्र में रखा गया है. माना जा रहा है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण आबादी को बड़ा लाभ मिलेगा.(शशिभूषण का इनपुट)
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