गोरखपुर की नीतू बनीं मिसालउत्तर प्रदेश के गोरखपुर में ड्रोन दीदी योजना से जुड़ी महिलाएं खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी कमाई बढ़ा रही हैं. गोरखपुर के मेरौली गांव की रहने वाली नीतू पासवान भी ऐसी ही एक ड्रोन दीदी हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में कई मुश्किलें आईं, लेकिन ड्रोन की ट्रेनिंग मिलने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया. आज वह ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में दवा और तरल खाद का छिड़काव कर कमाई कर रही हैं.
नीतू पासवान गोरखपुर जिले के कौड़ीराम ब्लॉक के मेरौली गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें वर्ष 2024 में ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग मिली थी. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने ड्रोन से खेतों में छिड़काव का काम शुरू किया. नीतू का कहना है कि शुरुआत में काम आसान नहीं था और कई तरह की परेशानियां सामने आईं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ड्रोन चलाने और खेतों में इसका इस्तेमाल करने का तरीका सीख लिया. अब उन्हें इस काम से अच्छी आमदनी हो रही है.
नीतू पासवान के मुताबिक, ड्रोन से खेतों में छिड़काव का काम अच्छा चलने पर वह महीने में करीब 50 से 60 हजार रुपये तक कमा लेती हैं. सालभर में उनकी कमाई करीब 5 से 6 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. उन्होंने बताया कि ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में कम समय में कीटनाशक और तरल उर्वरक का छिड़काव किया जाता है. इससे किसानों का समय और मेहनत दोनों बचते हैं. वहीं, महिलाओं के लिए यह काम कमाई का नया जरिया बन रहा है.
ड्रोन की मदद से खेतों में छिड़काव का काम पहले के मुकाबले काफी जल्दी किया जा सकता है. ड्रोन दीदी करीब 5 से 7 मिनट में एक से डेढ़ एकड़ खेत में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी या कीटनाशक का छिड़काव कर सकती हैं. इससे किसानों को खेत में मजदूरों के जरिए छिड़काव कराने की जरूरत कम पड़ती है. साथ ही महिलाओं को भी गांव में ही तकनीक से जुड़ा काम और कमाई का अवसर मिलता है.
ड्रोन दीदी योजना का मकसद ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराए जाते हैं. महिलाओं को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे खुद किसानों को स्प्रे की सुविधा दे सकें. इससे महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं मिलता, बल्कि वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना भी सीखती हैं. यही वजह है कि ड्रोन दीदी योजना को ग्रामीण महिलाओं के तकनीकी और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन की खरीद के लिए केंद्रीय सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाती है. योजना के अनुसार लागत का 80 प्रतिशत तक केंद्रीय सहायता यानी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है. बाकी 20 प्रतिशत राशि के लिए कम ब्याज दर पर कर्ज की सुविधा दी जाती है. इससे स्वयं सहायता समूहों के लिए ड्रोन खरीदना आसान होता है और महिलाएं कृषि क्षेत्र में ड्रोन आधारित सेवा शुरू कर पाती हैं. सरकार इस योजना पर करीब 1,261 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.
ड्रोन से छिड़काव की सुविधा किसानों के लिए भी फायदेमंद है. खेतों में कीटनाशक और तरल उर्वरक का छिड़काव कम समय में किया जा सकता है. वहीं, ड्रोन सेवा देने वाली महिलाओं को इसके बदले किसानों से किराया मिलता है. इस तरह योजना से एक तरफ किसानों को आधुनिक कृषि सुविधा मिल रही है तो दूसरी तरफ महिलाओं के लिए कमाई का रास्ता खुल रहा है. कई महिलाएं इस काम के जरिए अच्छी अतिरिक्त आय हासिल कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
नीतू पासवान ने अपनी सफलता का श्रेय ड्रोन की ट्रेनिंग और सरकारी मदद को दिया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस योजना से महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है. नीतू का कहना है कि सरकार की मदद से महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और अच्छी कमाई कर रही हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए ऐसी योजनाएं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही हैं.
ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खोल रही है. पहले जहां कृषि में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से खेतों में मेहनत करने तक सीमित रहती थी, वहीं अब वे ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक भी चला रही हैं और उससे कमाई कर रही हैं. गोरखपुर की नीतू पासवान की कहानी बताती है कि सही ट्रेनिंग, सरकारी सहायता और मेहनत के साथ गांव की महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. ड्रोन के जरिए खेती में बदलाव के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी यह योजना नई उम्मीद पैदा कर रही है. (गजेन्द्र त्रिपाठी का इनपुट)
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