खेती के लिए फ्री मिलेगा ट्रैक्टरकर्नाटक सरकार ने छोटे और जरूरतमंद किसानों की मदद के लिए बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, राज्य कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की ‘नेगिला योगी’ (खेती करने वाले तपस्वी) योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत तीन एकड़ तक जमीन वाले किसानों को खेती के लिए ट्रैक्टर और दूसरी जरूरी सेवाएं फ्री में उपलब्ध कराई जाएंगी. सरकार इसके लिए निजी ट्रैक्टर मालिकों से ट्रैक्टर किराए पर लेगी. उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि राज्य के कई गांवों में कुछ किसानों के पास अपने ट्रैक्टर हैं. वे अपनी खेती का काम पूरा करने के बाद इन ट्रैक्टरों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. ऐसे ट्रैक्टरों को सरकार किराए पर लेकर दूसरे जरूरतमंद किसानों के खेतों में खेती के काम के लिए इस्तेमाल करेगी.
अगर किसी गांव में ट्रैक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकार दूसरे इलाकों से ट्रैक्टर की व्यवस्था करेगी. जरूरत ज्यादा होने पर सरकार 500 से 1,000 तक ट्रैक्टर खरीदने पर भी विचार कर सकती है. सरकार ने इस योजना के लिए पहले ही 152 करोड़ रुपये मंजूर किया है. यह योजना शुरुआत में 31 तालुकों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगी. वहीं, हर चुने गए तालुके में एक प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा. अगर योजना सफल रहती है, तो अगले साल इसे राज्य के बाकी तालुकों तक बढ़ाया जाएगा.
सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद छोटे किसानों की खेती का खर्च कम करना, खेती का उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा करना है. कर्नाटक में करीब 59 लाख किसान हैं और इस योजना से खास तौर पर छोटे किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
कर्नाटक सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने का भी फैसला किया है. सरकार ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट इमेजिंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करेगी. इसमें बाढ़, भूस्खलन और दूसरी आपदाओं के दौरान जल्दी जानकारी जुटाने, जोखिम वाले इलाकों में बचाव कार्य करने और समय पर चेतावनी देने पर जोर रहेगा. सरकार जियोस्पेशियल एनालिटिक्स, AI आधारित निर्णय सिस्टम, अर्ली वार्निंग सिस्टम और आखिरी छोर तक संचार व्यवस्था को भी मजबूत करेगी.
सरकार ने चिक्काबल्लापुर में ड्रोन टेस्टिंग फैसिलिटी बनाने का फैसला किया है. उप-मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह देश में अपनी तरह की पहली सुविधा हो सकती है. यहां ड्रोन की टेस्टिंग केवल लैब के अंदर नहीं होगी, बल्कि फील्ड में भी ड्रोन का परीक्षण किया जाएगा. परमेश्वर ने बताया कि ड्रोन का इस्तेमाल आने वाले समय में दवा पहुंचाने, लोगों को कम दूरी तक ले जाने और दूसरे जरूरी कामों में बढ़ सकता है, इसलिए सरकार इस तकनीक को पहले से अपनाने की तैयारी कर रही है. कर्नाटक सरकार का कहना है कि इन फैसलों का मकसद किसानों को आधुनिक सुविधाएं देना और नई तकनीक को बढ़ावा देना है. (PTI)
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