मोहाली में ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों की हड़तालट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने केंद्र की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ हड़ताल की है. इसमें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. और भी कई किसान संगठन ट्रेड यूनियनों की हड़ताल के सपोर्ट में आए हैं. संगठनों ने पूरे भारत में हड़ताल बुलाई है जिसका असर पंजाब के मोहाली में भी देखा गया. यहां बिजली कर्मचारी हड़ताल पर बैठे. किसान भी हड़ताल में शामिल हुए और भारत-US ट्रेड डील का विरोध किया.
किसानों का कहना है कि भारत-US ट्रेड डील से किसानों और एग्रीकल्चर सेक्टर को नुकसान होगा. किसानों का कहना है कि अगर ट्रेड डील कैंसिल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. किसान यूनियन का कहना है कि सरकार यह कहकर गुमराह कर रही है कि इस डील से खेती के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. किसानों ने बीज बिल का भी विरोध किया. साथ ही, कर्मचारियों ने प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल का विरोध किया.
मोहाली में किसानों ने कहा कि सरकार हर काम का निजीकरण कर रही है. चाहे बीज बिल हो, बिजली संशोधन बिल हो या मनरेगा, सबका निजीकरण किया जा रहा है. इससे किसानों का बहुत नुकसान होगा. सरकार लेबर कोड भी लेकर आई है जिसका सारा संबंध कॉरपोरेट से है. किसानों ने कहा कि दिनों दिन किसान, मजदूर और छोटे कर्मचारियों पर बोझ बढ़ रहा है और उन्हें दबाया जा रहा है. इसके विरोध में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में संयुक्त किसान मोर्चा ने हिस्सा लिया है.
संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का भी विरोध किया. किसानों ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर यह समझौता थोपने की कोशिश की है जिससे किसानों को नुकसान होगा. एक किसान ने कहा कि सरकार भले कह रही है कि ट्रेड डील से कृषि को अलग रखा गया है, लेकिन सच्चाई है कि उस पर बहुत बड़ा असर होने जा रहा है. ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 18 परसेंट टैरिफ लगा दिया जिसका प्रभाव बहुत गंभीर होगा. किसानों ने कहा, भारत में अमेरिका का सामान जीरो परसेंट ड्यूटी पर आएगा. साल दो साल अमेरिका का सामान भारत में सस्ता पड़ेगा, लेकिन बाद में महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाएगी.
किसानों ने कहा कि जिस तरह कपास का हाल हुआ, उसी तरह डेयरी का भी हाल होगा. अमेरिका से नरमा भारत आ रहा है जिससे लोकल किसानों की उपज का भाव गिर गया है, किसान परेशान है. उसी तरह डेयरी प्रोडक्ट के साथ भी होगा. अमेरिका से माल आएगा तो हमारा लोकल माल नहीं बिकेगा.
किसानों का पंजाब सरकार के खिलाफ भी नाराजगी है. किसानों ने कहा कि केंद्र के सभी फैसले पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान लागू करा रहे हैं, इसलिए वे बराबर के दोषी हैं. बिजली मीटर के विरोध में किसानों ने कहा कि नए-नए मीटर लग रहे हैं जो केंद्र के इशारे पर किया जा रहा है. किसान इसके विरोध में हैं क्योंकि उनका खर्च बढ़ जाएगा. बजट में भी किसानों और मजदूरों के लिए कुछ नहीं दिया गया जबकि देश का तीन हिस्सा किसानों और मजदूरों का है. यह आबादी पूरे देश को खिलाती है, लेकिन बजट में उसे पौने तीन परसेंट भी नहीं मिला.
किसानों का आरोप है कि बजट से न तो किसानों का कर्ज माफ होगा और न ही उन्हें सब्सिडी मिलेगी. बजट से किसान बहुत पीछे चला जाएगा और दिन प्रतिदिन कॉरपोरेट का कब्जा बढ़ रहा है. किसानों के साथ मजदूर यूनियनों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और लेबर कोड बिल रद्द करने की मांग की. पंजाब के मोहाली में इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के कई सदस्यों ने बिजली संशोधन कानून का विरोध किया और केंद्र-पंजाब सरकार के खिलाफ नारे लगाए.
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