भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों में गुस्साभारत और अमेरिका के बीच जो नया ट्रेड समझौता हुआ है, उससे किसानों में बहुत गुस्सा देखने को मिल रहा है. करनाल में भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसान नेताओं ने कहा कि इस ट्रेड डील से किसानों को बहुत नुकसान होगा. किसान डर रहे हैं कि उनका मेहनत का फल सही दाम पर नहीं बिकेगा और उनकी आय कम हो जाएगी. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्न मान ने कहा कि ट्रेड डील के बाद किसानों में हलचल मची हुई है. उन्होंने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा इस मुद्दे पर पूरी तरह तैयार है.
आने वाली 24 फरवरी को कुरुक्षेत्र की जाट धर्मशाला में संयुक्त किसान मोर्चा की बहुत बड़ी पंचायत होगी. इस पंचायत में किसानों के लिए बड़े निर्णय लिए जाएंगे. इसके अलावा, 12 फरवरी को देशभर में जीतनी भी किसान यूनियन और अन्य किसान संगठन हैं, वे मिलकर हड़ताल करेंगे.
किसानों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह डील बिल्कुल गलत है. उनका कहना है कि अमेरिका से आने वाला सामान, चाहे वह दूध हो या फल, हमारे देश में बहुत सस्ता मिलेगा. इससे हमारे देश के किसानों का माल बिकना मुश्किल हो जाएगा. किसानों को डर है कि उनके मेहनत से तैयार किए गए फल, दूध और अन्य उत्पाद का सही दाम नहीं मिलेगा. अगर उनके उत्पाद बिकेंगे ही नहीं, तो उनका नुकसान बहुत बड़ा होगा.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस ट्रेड डील में किसानों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. लेकिन किसान नेता रत्न मान और अन्य किसान इसे सही नहीं मानते. उनका कहना है कि सरकार का यह बयान किसानों को गुमराह कर रहा है. किसान नेताओं का कहना है कि जब किसान की जान, मजदूरी और आजीविका का सवाल होता है, तब किसानों से सही बातचीत नहीं होती.
किसानों का कहना है कि यह डील डेरी, खेती और फल सब पर बहुत बड़ा असर डालेगी. अगर अमेरिका से सस्ता सामान आएगा, तो भारतीय किसान का माल कोई नहीं खरीदेगा. इससे किसानों की आय बहुत कम हो जाएगी और उनका जीवन मुश्किल हो जाएगा. किसान नेताओं ने साफ कहा कि वे इस स्थिति को कभी भी नहीं सहन करेंगे.
किसान नेता और किसान संगठन पूरे देश में आंदोलन के लिए तैयार हैं. 12 फरवरी को हड़ताल और 24 फरवरी को कुरुक्षेत्र में पंचायत, दोनों कार्यक्रम किसानों की नाराज़गी दिखाते हैं. किसान यह चाहते हैं कि सरकार उनकी बात सुने और उनके हितों का ध्यान रखे. किसान यह नहीं चाहते कि उनकी मेहनत और आजीविका खतरे में पड़े.
किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि देश में कोई भी डील किसानों को नुकसान पहुँचाए, वह सही नहीं है. उनका संदेश साफ है कि जब तक उनकी मेहनत की कीमत और उनका भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, वे इस डील के खिलाफ आवाज़ उठाते रहेंगे. किसानों का यह आंदोलन उनकी आजीविका और देश के कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए है.
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