खटीमा में जमीन का बड़ा विवादउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के घर के ठीक बगल में 125 एकड़ की कृषि भूमि पर खड़ी हरी फसल को नष्ट कर दिया गया. एक सप्ताह पुराने इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तो अब खटीमा से कांग्रेस के विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि प्रशासन ने अपने संरक्षण में हरी फसल को नष्ट करवा कर एक भूमाफिया को अवैध कब्जा करवा दिया. सीएम धामी ने डीएम को मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
दरअसल, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी के घर से लगी बेशकीमती जमीन पर खड़ी हरी फसल को पिछले सप्ताह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नष्ट कर दिया गया था. ये घटना उत्तराखंड के खटीमा तहसील अंतर्गत ग्राम बकुलिया, दमगढ़ा की है. पुलिस और प्रशासन ने एक सप्ताह पहले, हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए, 125 एकड़ की उपजाऊ कृषि भूमि पर खड़ी फसल को ट्रैक्टरों से रौंद दिया. इस जमीन पर कश्मीर सिंह नाम के एक व्यक्ति को कब्जा दिलवा दिया गया.
यह मामला सामने आने पर खटीमा से कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने मोर्चा खोल दिया है. लहलहाती गन्ना, गेहूं और हरे चारे की फसल को नष्ट करने में कई ट्रैक्टर लगे. दो दर्जन से अधिक बिना नंबर के ट्रैक्टर और मुंह पर साफा बांधे ट्रैक्टर ड्राइवर किसी अवैध कब्जे की और इशारा कर रहे थे. सीएम धामी के घर के आस पास के सभी थानों की भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में यह काम हुआ. बिना किसी बड़े अधिकारी के आदेश के यह काम संभव नहीं है.
बता दें कि आजादी के समय जब यहां कोई आना नहीं चाहता था. तब शहीद हरि कृष्ण तलवार ने अपने साथियों के साथ यहां आकर तराई को आबाद कर सैकड़ों लोगो कों रोजगार दिया था. शहीद हरि कृष्ण तलवार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अनेक अवसरों पर सहयोग किया था और कई बार अंग्रेजों से लड़ाई में बोस को अपना संरक्षण भी दिया था. उन्हीं के बेटे हैं किरण तलवार और किरण के बेटे हैं युवराज तलवार. तभी से यह परिवार इस 125 एकड़ जमीन पर काबिज है. युवराज तलवार के वकील पारस ने कहा कि यह एक भ्रूण हत्या जैसा कृत्य है. अगर जमीन कश्मीर सिंह की है तो पुलिस प्रसाशन को वहां पर मौजूद लोगों को कोई पेपर क्यों नहीं दिखाया.
इस पूरी घटना से पीड़ित जमींदार युवराज तलवार का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या विधिसम्मत नोटिस के कोर्ट के आदेश का हवाला देकर उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कराया गया. पीड़ित का कहना है कि यह कार्यवाही पूरी तरह मनमानी और साजिशन तरीके से की गई.
इस मामले में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और वीएचपी नेता गणेश ठाकुराठी ने बताया कि उनके पास सुबह फोन आया कि कई ट्रैक्टर खेत में खड़ी फसल नष्ट कर रहे हैं. तब मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने वहां मौजूद उप जिलाधिकारी तुषार सैनी से फसल नष्ट करने का आदेश मांगा तो अधिकारी उन्हें किसी भी प्रकार का कोई आदेश नहीं दिखा पाए.
वहीं बीजेपी किसान मोर्चा के संयोजक मनोज शाही ने कहा कि इससे किसानों में बहुत अधिक बचेनी है. सीएम धामी उनके बीच के ही हैं इसलिए उनसे हमें न्याय की पूरी उम्मींद है.
फिलहाल गांव और आसपास के क्षेत्र के किसानों में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही किए जाने की मांग कर रहे हैं. गाव में महापंचायत कर आसपास के ग्रामीणों ने मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए न्याय ना मिलने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है.(राजेश छाबड़ा का इनपुट)
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