ट्रेड डील, बीज और बिजली विधेयकों के खिलाफ बीकेयू का विरोध, टिकैत ने बताया ‘खामोश समझौता’

ट्रेड डील, बीज और बिजली विधेयकों के खिलाफ बीकेयू का विरोध, टिकैत ने बताया ‘खामोश समझौता’

भारतीय किसान यूनियन ने भारत-अमेरिका एफटीए, बीज और बिजली संशोधन विधेयकों के खिलाफ किसान संवाद आयोजित किया. राकेश टिकैत ने समझौते को ‘खामोश समझौता’ बताते हुए किसान आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी.

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ट्रेड डील, बीज और बिजली विधेयकों के खिलाफ बीकेयू का विरोध, टिकैत ने बताया ‘खामोश समझौता’ट्रेड डील के खिलाफ बीकेयू

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने मंगलवार को संविधान क्लब ऑफ इंडिया में किसान संवाद कार्यक्रम का आयोजन कर प्रस्तावित भारत–अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और बीज और बिजली संशोधन विधेयकों का विरोध किया. इस कार्यक्रम में विपक्षी दलों के कई सांसद भी शामिल हुए, जिसके बाद नेताओं ने मीडिया से बातचीत की. पत्रकारों से बात करते हुए बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बीज विधेयक दशकों बाद एक बार फिर संसद में लाया गया है.

“1992 में जो शुरू हुआ था, वह फिर लौट आया है. बीज विधेयक वापस आ गया है. अमेरिका के साथ समझौता किसानों को बर्बाद कर देगा. जब हम गांवों में जाते हैं तो लोग हमसे पूछते हैं कि यह समझौता क्या है. यह एक ‘खामोश समझौता’ है,” टिकैत ने कहा. उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी बयानों में “अन्य फसलें” जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल असीमित आयात का रास्ता खोल सकता है.

“इससे किसान और आदिवासी समुदाय तबाह हो जाएंगे. बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक किसानों से बिना सलाह के लाए गए हैं,” उन्होंने कहा. टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन को तेज करने के लिए तैयार हैं. “हम सरकार से बात करना चाहते हैं, लेकिन वह सुन नहीं रही है. हम इन समझौतों और विधेयकों के खिलाफ सड़कों पर उतरने को तैयार हैं,” उन्होंने कहा.

विपक्षी सांसदों ने जताई चिंता

आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बीज, कीटनाशक और बिजली से जुड़े तीनों विधेयक किसानों के हितों के खिलाफ हैं. “अमेरिका के साथ एफटीए उन उत्पादों के लिए रास्ता खोल देगा, जो वहां प्रतिबंधित हैं. सरकार ने स्थायी समितियों की सिफारिशों को नहीं माना. यूरोपीय संघ और अमेरिका दोनों के साथ समझौते भारत के अधिशेष को प्रभावित करेंगे. यह एक असमान समझौता है,” उन्होंने कहा.

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने सरकार की व्यापार और शुल्क नीतियों की आलोचना की. “पहले अमेरिका ने 2.9 प्रतिशत शुल्क लगाया, फिर उसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया और अब 18 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, भारत ने अमेरिकी उत्पादों के लिए अपना बाजार शून्य प्रतिशत शुल्क पर खोल दिया है,” सिंह ने कहा.

उन्होंने कहा कि सरकारी बयानों में “अन्य फसलें” शब्द का मतलब असीमित आयात से है. “जब वे ‘अन्य फसलें’ कहते हैं, तो इसका मतलब होता है कि सब कुछ आएगा. अमेरिका भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव भी बना रहा है. मंत्री एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं,” उन्होंने आरोप लगाया. सिंह ने बीज कानूनों में बदलाव के प्रभाव को लेकर भी चेतावनी दी.

“बीज अधिनियम से भारतीय पैसा विदेशी कंपनियों के पास जाएगा. आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज पहले ही उत्तर और दक्षिण भारत के कई इलाकों में कपास की फसल को नुकसान पहुंचा चुके हैं. यह भारतीय बीज बाजार के लिए आपदा साबित होगा,” उन्होंने कहा. 

संसद में विरोध का आह्वान

नेताओं ने कहा कि समान विचारधारा वाले सांसद इन विधेयकों का संसद के भीतर विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं. “हमने सांसदों से कहा है कि वे संसद में किसानों की लड़ाई लड़ें,” टिकैत ने कहा.(अनमोल नाथ बाली की रिपोर्ट)

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