संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन करते हुए विपक्षी सांसद (फोटो-एएनआई)किसानों और ट्रेड यूनियनों के समर्थन में देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों की गूंज गुरुवार को संसद परिसर तक पहुंच गई. केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को निशाने पर लेते हुए विपक्ष ने इसे देश के किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया और “ट्रैप डील” करार दिया. हाथों में तख्तियां लेकर खड़े सांसदों ने कहा कि मौजूदा नीतियां आम लोगों की आजीविका को कमजोर कर रही हैं, जबकि बड़े कॉरपोरेट समूहों को फायदा पहुंचाया जा रहा है.
विपक्षी नेताओं ने कहा कि ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाया गया भारत बंद सिर्फ मजदूर संगठनों का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग की साझा चिंता की अभिव्यक्ति है. श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण, कृषि और व्यापार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बिना व्यापक चर्चा के ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर खेती, रोजगार और घरेलू बाजार पर पड़ रहा है.
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर संसद के भीतर पहले ही सियासी घमासान तेज है. बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि दुनिया इस समय बड़े वैश्विक संकट के दौर से गुजर रही है. एकध्रुवीय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और ऊर्जा और वित्त को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे हालात में भारत को बेहद सतर्कता के साथ कदम उठाने की जरूरत है.
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने इन वैश्विक सच्चाइयों को स्वीकार करने के बावजूद ऐसे समझौते को आगे बढ़ाया है, जिससे भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है. ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों के जरिए किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप देश की नीति निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. इसीलिए किसानों और मजदूरों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कार्यवाही स्थगन का नोटिस दिया. उन्होंने सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान और अंतरिम व्यापार समझौते पर तुरंत स्पष्ट बयान दिया जाए. तिवारी ने कहा कि संयुक्त बयान में रूसी तेल खरीद और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ संभावित वायदों का जिक्र सामने आ रहा है. अगर ऐसे वादे किए गए हैं तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हित और रणनीतिक स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
मनीष तिवारी ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता. उन्होंने प्रश्नकाल और शून्यकाल स्थगित कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की. उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का सीधा असर देश की खेती, रोजगार और उपभोक्ता बाजार पर पड़ता है, इसलिए इन्हें संसद में खुली बहस के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए.
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इससे किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने पत्रकारों से कहा, “भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते से किसानों को भारी नुकसान होने वाला है. आज सभी श्रमिक संघ हड़ताल पर हैं और हम उनका समर्थन कर रहे हैं.” (एएनआई)
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