बीज विधेयक 2025 पर घमासान: भारत बंद से पहले SKM ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह से पूछे 10 सवाल

बीज विधेयक 2025 पर घमासान: भारत बंद से पहले SKM ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह से पूछे 10 सवाल

केंद्र सरकार के प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 को लेकर विवाद तेज हो गया है. भारत बंद से पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से 10 सवाल पूछते हुए बिल को किसान विरोधी और कॉर्पोरेट हित में बताया. जानिए क्या हैं मुख्य आपत्तियां.

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बीज विधेयक 2025 पर घमासान: भारत बंद से पहले SKM ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह से पूछे 10 सवालseed bill 2025

केंद्र सरकार मौजूदा सत्र में बीज विधेयक 2025 लाने वाली है. इस विधेयक में नकली बीजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान होगा. नकली बीज के धंधे में लगे लोगों के खिलाफ सरकार कड़ा कानून लाएगी. सरकार का कहना है कि विधेयक से खेती में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. दूसरी ओर, किसान संगठनों ने इस विधेयक का विरोध शुरू कर दिया है. 12 फरवरी के भारत बंद में किसानों ने बीज विधेयक के खिलाफ भी आवाज बुलंद करने की बात कही है. इस बंद से एक दिन पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने बीज विधेयक 2025 पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से 10 सवाल पूछे हैं.

  1. आपने यह कैसे घोषित कर दिया कि बीज विधेयक 2025 भारतीय कृषि और किसानों की रक्षा करता है, जबकि देशभर के किसान इसके बड़े बहुराष्ट्रीय और घरेलू बीज कंपनियों के पक्ष में होने के कारण विरोध कर रहे हैं?
  2. जब कृषि राज्य का विषय है, तब केंद्र सरकार ने राज्यों से परामर्श किए बिना बीज विधेयक क्यों लागू किया? बीज विधेयक 2025, बिना राज्यों का प्रतिनिधित्व के, एक केंद्रीय बीज समिति का गठन करता है, जो बीज उत्पादन से लेकर परीक्षण तक सभी पहलुओं को नियंत्रित करेगी.
  3. विधेयक में समय पर और सस्ती दरों पर उत्तम गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान क्यों नहीं है? किसी भी किसान-पक्षीय बीज कानून में यह पहला प्रावधान होना चाहिए.
  4. आप पीपीवीएफआर अधिनियम का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं और किसानों को कॉर्पोरेट कंपनियों के बराबर क्यों रख रहे हैं? वर्तमान भारतीय कानून के तहत किसानों को बीज उत्पादन, संरक्षण, आदान-प्रदान और हस्तांतरण का अधिकार है. लेकिन बीज विधेयक 2025 छोटे पारंपरिक बीज उत्पादकों को बड़ी बीज कंपनियों के समान पंजीकरण के लिए बाध्य करता है, जिससे उन्हें एक ही स्तर पर खड़ा कर दिया जाता है.
  5. आप भारत में विदेशों में परीक्षण किए गए बीजों को अनुमति क्यों दे रहे हैं? भारत में 15 कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं, जिनकी मिट्टी और मानसून पैटर्न अलग-अलग हैं. विदेशी परीक्षण वाले बीज, जिनमें जीएम बीज भी शामिल हैं, भारतीय बीजों को प्रदूषित कर सकते हैं और हमारी बीज संप्रभुता, हमारे बीजों के आनुवंशिक डेटा पर हमारे अधिकार को खतरे में डाल सकते हैं. जब जीएम बीजों को लेकर सहमति नहीं है, तो उन पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया?
  6. आप बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय कृषि पर प्रभुत्व स्थापित करने की अनुमति क्यों दे रहे हैं? बीज विधेयक 2025 बहुराष्ट्रीय कंपनियों को जीईएसी और अन्य सरकारी नियामक निकायों को दरकिनार कर भारतीय कृषि में प्रवेश की खुली छूट देता है. आपने 1966 के बीज कानून को क्यों पलट दिया, जो भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार आयात को सीमित करता था? सभी आयातित बीज, पौधे और रोपाई की किस्मों को पहले भारतीय प्रयोगशालाओं द्वारा स्वतंत्र परीक्षण और अनुमोदन से क्यों नहीं गुजरना चाहिए?
  7. आप बीजों की अत्यधिक कीमतों को नियंत्रित क्यों नहीं कर रहे हैं? वर्तमान में सब्जी और संकर बीज किसानों की पहुंच से बाहर हो चुके हैं, फिर भी बीज विधेयक 2025 में मूल्य नियंत्रण का कोई प्रावधान नहीं है. बीजों की कीमतों के नियमित निर्धारण की नीति क्यों नहीं बनाई गई? 1983 के बीज नियम, जिसने बीजों की कालाबाजारी पर प्रतिबंध लगाया था, उसे क्यों पलट दिया गया?
  8. आप किसान सहकारिताओं और सार्वजनिक अनुसंधान को बढ़ावा क्यों नहीं दे रहे हैं? आईसीएआर, सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान, और किसान सहकारी समितियों द्वारा संचालित बीज गांव छोटे किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध करा सकते हैं. फिर भी बीज विधेयक 2025 में इन्हें समर्थन नहीं दिया गया है, जबकि बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” प्रदान किया गया है.
  9. आप नकली बीजों के कारण फसल नुकसान होने पर किसानों को सुलभ मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं सुनिश्चित कर रहे हैं? विशेषकर कपास क्षेत्र में नकली बीजों से फसल खराब होने के कारण कई किसान आत्महत्या करते हैं. फिर भी बीज विधेयक 2025 में किसानों को लाभ की हानि, खेती का खर्च, या नए बीज और बीज बीमा की लागत का अनिवार्य मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है. किसानों को फसल नुकसान की शिकायत दर्ज करने का अधिकार क्यों नहीं दिया गया और यह अधिकार केवल बीज निरीक्षकों तक सीमित क्यों रखा गया?
  10. जब प्रत्येक बीज पैकेट पर क्यूआर कोड अनिवार्य किया जा रहा है, तो इंटरनेट की उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? कई छोटे उत्पादकों के पास सीमित इंटरनेट पहुंच है, फिर भी बीज विधेयक 2025 उन्हें क्यूआर कोड सुविधा अपनाने के लिए बाध्य करता है.

एसकेएम ने अंत में लिखा है, यदि उपरोक्त 10 प्रश्नों का आपके पास संतोषजनक उत्तर नहीं है, तो देशभर के किसान आपसे दृढ़ मांग करते हैं कि आप संसद में बीज विधेयक 2025 को पारित कराने से विरत रहें और भारतीय कृषि और जनता के बीज संप्रभुता के अधिकार को विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय पूंजी और डब्ल्यूटीओ के हाथों सौंपने से बचें.

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