कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल (फाइल फोटो)कोंकण क्षेत्र में आम और काजू की खेती से जुड़े किसानों की परेशानियों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. 18 अप्रैल को किसानों ने रत्नागिरी में एक बैठक बुलाई है, जिसे कांग्रेस का भी समर्थन मिल गया है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को राज्य की भाजपा नीत महायुति सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि जलवायु बदलाव के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है, लेकिन प्रभावित किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है. सपकाल ने स्पष्ट कहा कि आम और काजू उत्पादकों को तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत है, क्योंकि लगातार बढ़ते तापमान और मौसम में अस्थिरता ने उनकी फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि किसान संकट में हैं.
इसी मुद्दे पर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को कांग्रेस ने समर्थन देने का ऐलान किया है. सपकाल ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होंगे. इससे पहले संगठन के प्रमुख राजू शेट्टी ने मुंबई में सपकाल से मुलाकात कर किसानों की स्थिति और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की.
शेट्टी ने बताया कि प्रतिकूल मौसम के चलते कोंकण में आम और काजू का उत्पादन तेजी से घटा है, जबकि लागत लगातार बढ़ रही है. किसानों को एक आम के पौधे पर सालाना लगभग 3800 से 4000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है और मजदूरी भी करीब 800 रुपये प्रतिदिन देनी पड़ती है. इसके मुकाबले मुआवजा बेहद कम, करीब 200 रुपये प्रति पौधा ही मिल पा रहा है.
उन्होंने बीमा कंपनियों पर भी आरोप लगाया कि वे किसानों को उचित भुगतान नहीं कर रही हैं. शेट्टी ने राज्य सरकार से राहत बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से भी सहायता देने की मांग की है. आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 18 अप्रैल को रत्नागिरी में किसानों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें अगले कदम तय किए जाएंगे.
शेट्टी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो मुंबई में गिरगांव से मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ तक बड़ा मोर्चा निकाला जाएगा. इस बीच, सपकाल ने प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह परियोजना आम जनता की जरूरत नहीं है और इसे चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है. कांग्रेस ने इस परियोजना का विरोध करने का ऐलान किया है. (पीटीआई)
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