
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने एक नई पहचान बनाई है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा शुरू की गई है.इस अभिनव पहल के साथ धमतरी देश का पहला जिला बन गया है, जहां सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
समिति लोहरसी में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों के सामने सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन के दौरान किसानों को बताया गया कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक एवं समान छिड़काव किया जा सकता है. इससे खेती में समय की बचत होगी, लागत कम आएगी और फसल प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा.
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सहकारी समितियों के जरिए किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का यह एक अभिनव प्रयास है. ड्रोन तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है. इससे किसान कम समय और कम लागत में अधिक दक्षता के साथ खेती कर सकेंगे.
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य हर किसान को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है ताकि उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि हो सके.धमतरी को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
इस योजना की एक और खास बात यह है कि CSC e-Governance के सहयोग से PACS समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में भी विकसित किया जा रहा है. इससे किसानों को एक ही स्थान पर ड्रोन स्प्रेयर जैसी आधुनिक कृषि सेवाओं के साथ विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाओं का लाभ भी मिलेगा. इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी और सहकारी समितियां बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी.
जिले में जिन समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है, उनमें बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही और करेली समितियां शामिल हैं. इन समितियों के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आवश्यकता के अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक के उपयोग से कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा.इससे रसायनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा और किसानों की श्रम लागत में कमी आएगी. साथ ही खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान की संभावना भी घटेगी.
ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं न केवल खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी बनाएंगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा करेंगी.
धमतरी जिले की यह पहल कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल तकनीक और सहकारिता मॉडल के प्रभावी समन्वय का उदाहरण बनकर उभरी है. ड्रोन तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने की यह कोशिश भविष्य की स्मार्ट खेती की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक टिकाऊ एवं आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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