किसान कर्जमाफी की शर्तों पर एनसीपी एसपी ने उठाए सवाल (सांकेतिक तस्वीर)महाराष्ट्र सरकार की नई कृषि कर्जमाफी योजना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर नवी मुंबई में प्रदर्शन किया. इस दौरान पार्टी नेताओं ने खास तौर पर राज्य की नई कृषि कर्जमाफी योजना की शर्तों को किसानों के लिए नुकसानदेह बताया. प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने आरोप लगाया कि सरकार की आय बढ़ने के बावजूद आम लोगों पर बोझ डाला जा रहा है.
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान जनता की परेशानियों से ज्यादा चुनावी राजनीति पर दिखाई दे रहा है. शिंदे ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर होने का असर ईंधन आपूर्ति और किसानों के निर्यात अवसरों पर भी पड़ रहा है. शशिकांत शिंदे ने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस की ओर से कार्यकर्ताओं को नोटिस दिए गए और रास्ते बंद किए गए, ताकि लोग आंदोलन में शामिल न हो सकें.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार जनता की शिकायतों पर ध्यान नहीं देती है तो महाविकास आघाड़ी राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगी. हालांकि, प्रदर्शन का सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार की नई कृषि कर्जमाफी योजना रही. एनसीपी (एसपी) के महासचिव और विधायक रोहित पवार ने योजना की शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों तक पहुंच ही नहीं पाएगा.
रोहित पवार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से घोषित व्यवस्था में जिन किसानों पर 50 हजार रुपये से अधिक बकाया है, उन्हें पहले अतिरिक्त राशि खुद जमा करनी होगी, उसके बाद ही वे कर्जमाफी के पात्र बनेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में औसत फसल लोन करीब 1 लाख रुपये माना जाता है और ऐसे में अगर किसी किसान पर 1 लाख रुपये का बकाया है तो उसे पहले 50 हजार रुपये चुकाने होंगे, तब जाकर उसे राहत मिलेगी.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था कर्जमाफी से ज्यादा कर्ज वसूली जैसी दिखाई देती है. रोहित पवार ने कहा कि पहले 2008 और 2019 में लागू कर्जमाफी योजनाओं में ऐसी शर्तें नहीं रखी गई थीं और किसानों को व्यापक राहत दी गई थी. महाराष्ट्र कैबिनेट ने हाल ही में 36,585 करोड़ रुपये की कृषि कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी है, जिससे करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने का अनुमान जताया गया है. यह फैसला महायुति गठबंधन के चुनावी वादों में शामिल था.
रोहित पवार ने मांग की कि महायुति सरकार मौजूदा योजना से सभी शर्तें हटाए, ताकि अधिक किसानों को वास्तविक राहत मिल सके. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बदलाव नहीं किया गया तो पार्टी किसानों के मुद्दे पर आगे आंदोलन करेगी. साथ ही उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी पर भी सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की. (पीटीआई)
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