पानी के लिए किसानों का आंदोलनमहाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के ब्रम्हपुरी में किसान पिछले सात दिनों से पानी के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं. प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए किसानों ने गुरुवार को गोसीखुर्द नहर में उतरकर अनोखा आंदोलन किया. किसानों की मांग है कि ग्रीष्म ऋतु में गोसीखुर्द की नहर से पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि गर्मियों में भी फसल ली जा सके.
गोसीखुर्द नहर से ग्रीष्म ऋतु के लिए पानी नहीं दिए जाने के कारण 15 गांवों के किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है. चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी शहर में कार्यकारी अभियंता कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन जारी है. प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए बुधवार को किसानों ने परिजनों के साथ गोसीखुर्द की नहर में धरना दिया. किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक बांध से पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
इस क्षेत्र में चावल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाला चावल उगाया जाता है. वर्षा ऋतु की फसल के बाद खेत खाली पड़े रहते हैं. यदि गोसीखुर्द से पानी उपलब्ध हो तो दोहरी फसल यानी रबी सीजन की फसल उगाई जा सकती है. इससे किसानों को लाभ हो सकता है. नहर से पानी मिले बिना खेती करना असंभव है. इसलिए ब्रह्मपुरी तहसील के किसान भूख हड़ताल पर हैं.
एक किसान ने कहा, हमारा आंदोलन जारी है ताकि ग्रीष्म काल के लिए गोसीखुर्द से पानी मिलना चाहिए. हमें आश्वासन दिया गया था कि जल्द पानी मिलने का इंतजाम किया जाएगा. इसीलिए हमने अपन फसल बोई, लेकिन प्रशासन पानी देने से इनकार कर रहा है. इसीलिए हम आमरण अनशन कर रहे हैं. हम पांच लोगों में से दो किसानों की तबीयत बिगड़ने से उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है. दो किसानों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है. फिर भी हमारी मांग पूरी होने तक हम नहीं हटेंगे. हमारे हक का पानी हमें मिलना चाहिए.
आंदोलन करने वाले दूसरे किसान ने कहा, हमें ग्रीष्म काल की फसल के लिए पानी मिलना चाहिए. प्रशासन ने गोसीखुर्द डैम शुरू किया लेकिन पिछले 40 सालों से काम पूरा नहीं हुआ है. किसानों को सुखी संपन्न करने के लिए डैम शुरू किया गया लेकिन किसानों को उनके हक का पानी नहीं मिलता. इससे किसान कर्ज में डूबे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं.(विकास राजूरकर की रिपोर्ट)
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