धान के MSP पर भड़के कांग्रेस नेतापंजाब में खरीफ सीजन के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को लेकर राजनीति गरमा गई है. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने केंद्र सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने MSP में हुई बढ़ोतरी को 'किसानों के साथ मजाक' बताते हुए कहा है कि यह बढ़ती खेती लागत के मुकाबले बेहद कम है. राजा वारिंग का कहना है कि आज किसानों पर खाद, बीज, डीजल, बिजली और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों को राहत देने के बजाय उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकती है.
लुधियाना से सांसद राजा वारिंग ने बयान जारी कर कहा कि सरकार को MSP तय करते समय महंगाई और खेती की असली लागत को ध्यान में रखना चाहिए था, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही फायदा मिल सके. उन्होंने कहा कि खेती का खर्च लगातार बढ़ने से किसान खुद को परेशान और निराश महसूस कर रहे हैं. उनका दावा है कि इसी वजह से किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं और कई किसान आत्महत्या आ रहे हैं. राजा वारिंग ने कहा कि पंजाब देश के सबसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में शामिल है, इसलिए MSP में कम बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर यहां के किसानों पर पड़ेगा.
अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने सवाल उठाते हुए कहा कि धान के MSP में सिर्फ 72 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को क्या फायदा होगा, जब खेती का खर्च पहले ही बहुत ज्यादा बढ़ चुका है. उन्होंने कहा कि किसानों की प्रति एकड़ लागत सैकड़ों और हजारों रुपये तक बढ़ गई है. डीजल, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और मशीनों पर पहले से कहीं ज्यादा खर्च हो रहा है. ऐसे में MSP में हुई छोटी बढ़ोतरी किसानों को असली राहत नहीं दे पाएगी.
राजा वारिंग ने तंज कसते हुए कहा कि कागजों पर यह फैसला राहत जैसा दिखता है, लेकिन फसल तैयार होने तक बढ़ी हुई लागत इस फायदे को खत्म कर देती है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों की आय दोगुनी करने वाले पुराने वादे की भी याद दिलाई.
बता दें कि, केंद्र सरकार ने 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 72 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है, जिसके बाद अब सामान्य धान का MSP बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाले ‘ए-ग्रेड’ धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. यह नई दरें 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन यानी सितंबर-अक्टूबर से लागू होंगी.
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