BJP नेता गोपाल चंद्र साहापश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बेमौसम बारिश ने आलू किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. लगातार दो दिनों तक हुई बारिश से आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं. बताया जा रहा है कि जिले में करीब 50 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई है और किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. इसी बीच चुनावी माहौल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा किसानों के बीच पहुंचे, और खेत में किसानों के साथ आलू निकालते हुए देखा गया. इतना ही नहीं, उन्होंने खुद अपने सिर पर आलू की बोरी उठाकर किसानों के साथ काम भी किया. इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं.
मालदा जिले में बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती करते हैं. खासतौर पर मालदा विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन होता है. इसके अलावा गजोल, बामनगोला और हबीबपुर जैसे इलाकों में भी आलू की खेती की जाती है. राज्य में करीब 12 लाख हेक्टेयर जमीन पर आलू उगाया जाता है, लेकिन इस बार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
किसानों का कहना है कि इस बार आलू की कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलो है, लेकिन फसल खराब होने की वजह से उन्हें कोई फायदा नहीं मिल पा रहा. कई किसानों ने कर्ज लेकर और जमीन गिरवी रखकर खेती की थी, लेकिन अब वे नुकसान की वजह से परेशान हैं. उनका कहना है कि इस हालत में वे मजदूरी तक देने की स्थिति में नहीं हैं.
चुनाव प्रचार के दौरान गोपाल चंद्र साहा ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों को जरूरी सुविधाएं नहीं दे रही है और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के हित में काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार लिपिका बर्मन घोष ने भाजपा पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्या को समझती है और उन्हें मुआवजा देने की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोपाल चंद्र साहा पहले विधायक रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में कोई खास काम नहीं किया. इस बीच, मालदा में बारिश से खराब हुई आलू की फसल ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अब किसान सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि वे इस नुकसान से उबर सकें. चुनावी माहौल में यह मुद्दा भी सियासत का बड़ा विषय बन गया है.
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