बारिश से किसानों की बढ़ी चिंताउत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाई है, वहीं किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. साथ ही पशुओं के लिए हरा चारा लाना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है, जिससे खेती-किसानी का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
लगातार हो रही बरसात से किसानों को डर है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो गन्ना समेत अन्य फसलों में नुकसान बढ़ सकता है. पहले से ही गन्ने की फसल टॉप बोरर और अन्य रोगों से प्रभावित थी, ऐसे में लगातार नमी और जलभराव फसल की स्थिति को और खराब कर सकता है.
ग्रामीण किसान दिनेश कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों की भीषण गर्मी से इंसानों और पशुओं दोनों को राहत जरूर मिली है, लेकिन अब लगातार बारिश नई परेशानी बन गई है. खेतों में पानी भरने के कारण किसान पशुओं के लिए हरा चारा लेने नहीं जा पा रहे हैं. इससे पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि न तो खेतों से चारा लाया जा सकता है और न ही पशु पर्याप्त हरा चारा खा पा रहे हैं.
लगातार हो रही बारिश के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि मुजफ्फरनगर जिले के मोल्हाहेड़ी-जड़ौदा मार्ग तेज पानी के बहाव के कारण बह गया है. वीडियो में करीब 8 फीट चौड़ा ग्रामीण मार्ग पानी की तेज धारा में टूटकर बहता हुआ दिखाई दे रहा है. साथ ही किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण खेतों तक जाने वाले रास्ते बह जाने से उन्हें काफी दिक्कत हो रहा है. वहीं, इससे खेती-किसानी का काम बुरी तरह प्रभावित हो गया है. कई गांवों में तालाब और निचले इलाके पूरी तरह पानी से लबालब हैं. खेतों में पानी निकासी नहीं होने से फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
ऐसे में यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो जलभराव के कारण फसलों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं. इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. वहीं, पशुपालकों के लिए चारे की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन सकती है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए ताकि खेतों से अतिरिक्त पानी निकल सके और फसलों को नुकसान से बचाया जा सके. उनका कहना है कि समय रहते कदम उठाए गए तो खेती और पशुपालन दोनों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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