पांचना डैम से छोड़ा गया पानीराजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध से जुड़े लाखों किसानों को दो दशक बाद बड़ी राहत मिली, क्योंकि संबंधित कमेटियों के बीच सहमति बनने के बाद बांध से कमांड एरिया के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया. इसके साथ ही जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह ने पांचना बांध लिफ्ट सिंचाई परियोजना की आधारशिला रखी. दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और 61 करोड़ रुपये की लागत वाली गुडला लिफ्ट परियोजना के रीमॉडलिंग की भी घोषणा की गई. इस परियोजना से लगभग 13,000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होने और 35 गांवों के करीब 1.25 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के दखल के बाद हुए इस समझौते से 20 साल पुराना विवाद खत्म हो गया. अब इन योजनाओं पर काम शुरू होगा और किसानों को समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है.
20 साल के लंबे इंतजार के बाद पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहर में पानी छोड़ने की शुरुआत तो हुई, लेकिन तकनीकी खराबी ने पूरे कार्यक्रम पर पानी फेर दिया. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेड़म की मौजूदगी में जल पूजन के बाद प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन नहर के मुख्य हेड पर आई खराबी के कारण 35 गांवों के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका. इससे नाराज किसानों ने कई प्रमुख मार्गों पर जाम लगा दिया. पूरी रात प्रशासन और इंजीनियरिंग टीमें खराबी दूर करने में जुटी रहीं और मंगलवार सुबह हालात सामान्य करने में सफलता मिली.
करौली के पांचना बांध पर 6 जुलाई को राज्य सरकार की ओर से गुड़ला लिफ्ट परियोजना के 13 गांव, गंभीर नदी के किनारे बसे 360 गांवों और कमांड क्षेत्र के 35 गांवों के लिए सिंचाई जल छोड़ने का कार्यक्रम आयोजित किया गया. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, गृह राज्य एवं जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेड़म और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जल पूजन कर पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई.
हालांकि वर्षों से बंद पड़ी कमांड क्षेत्र की नहर के मुख्य हेड पर तकनीकी खराबी आने से 35 गांवों के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका. इस दौरान कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा भी किसानों के साथ नहर पर जल पूजन के लिए पहुंचे, लेकिन पानी नहीं आने से किसानों में भारी नाराजगी फैल गई.
गुस्साए किसानों ने हिंडौन-गंगापुर मार्ग, श्रीमहावीरजी-नादौती मार्ग और टोडाभीम-नादौती मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों पर जाम लगा दिया. रातभर चले जाम के कारण हजारों यात्रियों, वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
उधर, प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी पूरी रात तकनीकी खराबी दूर करने में जुटे रहे. मथुरा, भरतपुर, बयाना और टोंक के देवली से विशेषज्ञ इंजीनियरों को बुलाया गया. भारी मशीनों की मदद से करीब 40 फीट गहरे पानी में उतरकर इंजीनियरों ने नहर के मुख्य हेड पर मरम्मत का काम किया और मंगलवार सुबह पानी छोड़ने की स्थिति तैयार कर दी.
स्थिति की लगातार निगरानी के लिए ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल, भरतपुर रेंज के आईजी कैलाश चंद बिश्नोई, संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भुवन भास्कर, करौली जिला कलक्टर अक्षय गोदारा, सवाई माधोपुर जिला कलक्टर कानाराम, करौली पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारी, संवेदक और एसडीआरएफ की टीमें पूरी रात मौके पर डटी रहीं.
बताया जा रहा है कि पंचना बांध बनने के बाद वर्षों तक करौली के नादौती और सवाई माधोपुर के वजीरपुर क्षेत्र में इसी कमांड नहर से सिंचाई होती रही, लेकिन करीब 20 वर्ष पहले पानी बंद होने के कारण नहर के मुख्य हेड पर तकनीकी खराबी आ गई थी. अब मरम्मत के बाद प्रशासन जल्द ही कमांड क्षेत्र में नियमित रूप से पानी पहुंचाने का दावा कर रहा है.(गोपाल लाल माली का इनपुट)
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