बैल नहीं रहा तो पत्नी बनी सहारा, हल में जोतकर खेत जोतता दिखा किसान

बैल नहीं रहा तो पत्नी बनी सहारा, हल में जोतकर खेत जोतता दिखा किसान

महाराष्ट्र के लातूर में एक किसान द्वारा बैल की मौत के बाद अपनी पत्नी को हल में जोतकर खेती करने का वीडियो वायरल हुआ. घटना के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर किसान को नया बैल उपलब्ध कराया.

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बैल नहीं रहा तो पत्नी बनी सहारा, हल में जोतकर खेत जोतता दिखा किसानमहाराष्ट्र के लातूर जिले में भावुक कर देने वाली घटना

महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक भावुक और चिंता पैदा करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान अपनी पत्नी को हल में जोतकर खेत में बुवाई करता नजर आया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह मामला लातूर जिले के देवनी तहसील के बोंबली गांव का है. किसान का नाम काशीनाथ गायकवाड़ और उनकी पत्नी का नाम हौसाबाई गायकवाड़ है.

क्या है पूरा मामला?

जिले में मॉनसून की शुरुआत के साथ किसानों ने बुवाई का काम शुरू कर दिया है. लेकिन काशीनाथ गायकवाड़ के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई. करीब 15 दिन पहले तेज तूफान और बेमौसम बारिश हुई. इस दौरान उनके एक बैल पर बिजली गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई. खेती के लिए बैल बेहद जरूरी होता है, लेकिन खराब आर्थिक स्थिति के कारण काशीनाथ नया बैल खरीद नहीं पाए.

मजबूरी में लिया यह कदम

परिस्थिति से मजबूर होकर काशीनाथ ने अपनी पत्नी हौसाबाई को हल में जोतकर खेत में बुवाई का काम शुरू कर दिया. इस घटना में किसान खुद हल पकड़े हुए था और उसकी पत्नी हल खींचकर खेत जोत रही थी. इस पूरी घटना का वीडियो गांव में किसी ने रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई हुई और प्रशासन हरकत में आया. जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और किसान की मदद के लिए आगे आया. इसके बाद प्रशासन की ओर से काशीनाथ गायकवाड़ को एक बैल उपलब्ध कराया गया ताकि वे सामान्य तरीके से खेती कर सकें.

ग्रामीण हालात पर उठे सवाल

यह घटना ग्रामीण इलाकों में किसानों की आर्थिक स्थिति को उजागर करती है. कई छोटे किसान आज भी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. प्राकृतिक आपदा उनके लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है. यह मामला दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी विपत्ति भी किसानों को बेहद कठिन फैसले लेने पर मजबूर कर देती है. लातूर की यह घटना एक तरफ जहां किसान की मजबूरी को दिखाती है, वहीं दूसरी तरफ यह भी बताती है कि समय पर प्रशासनिक मदद मिलने से हालात बदले जा सकते हैं.

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