सूखे से बेहाल किसानों ने कराई मेंढकों की शादी, बारिश की आस में निकाली अनोखी शोभायात्रा

सूखे से बेहाल किसानों ने कराई मेंढकों की शादी, बारिश की आस में निकाली अनोखी शोभायात्रा

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के बोरमपल्ली गांव में सूखे और बारिश की कमी से परेशान किसानों ने पारंपरिक 'मेंढक विवाह' का आयोजन किया. गांव के लोगों ने अच्छी बारिश और फसलों को बचाने की कामना के साथ मेंढकों की शादी कर जुलूस निकाला और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए.

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सूखे से बेहाल किसानों ने कराई मेंढकों की शादी, बारिश की आस में निकाली अनोखी शोभायात्राआंध्र प्रदेश के अनंतपुर में सूखे से किसानों का बढ़ा संकट

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में बारिश नहीं होने से किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. खेतों में बोई गई फसलें सूखने लगी हैं और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कल्याणदुर्गम मंडल के बोरमपल्ली गांव के ग्रामीणों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए सदियों पुरानी परंपरा का सहारा लिया और 'मेंढक विवाह' का आयोजन किया.

गांव के लोगों का कहना है कि बीज बोए हुए करीब एक महीने हो गया है, लेकिन अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई. खेतों में नमी खत्म हो रही है और फसलें मुरझाने लगी हैं. किसानों के अनुसार आसमान में बादल तो बनते हैं, लेकिन तेज हवा उन्हें उड़ा ले जाती है, जिससे बारिश नहीं हो पा रही है.

बारिश के लिए मेंढकों की शादी

बारिश की प्रार्थना के लिए गांव के लोगों ने तालाब के पास से दो मेंढक पकड़कर उन्हें दूल्हा-दुल्हन का रूप दिया. पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों मेंढकों को हल्दी और अन्य शुभ सामग्री लगाई गई. इसके बाद गांव में सजाए गए एक पेड़ के नीचे विवाह की रस्में पूरी कराई गईं. पूरे आयोजन में गांव के बुजुर्गों और ग्रामीणों ने भाग लिया.

विवाह के बाद दोनों मेंढकों को टोकरी में रखकर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली गई. जुलूस के दौरान ढोल-नगाड़ों की धुन पर ग्रामीण पारंपरिक गीत गाते रहे. महिलाएं घरों के बाहर निकलकर रास्तों पर पानी डालती रहीं, जिसे बारिश के स्वागत का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान ग्रामीणों ने "अप्पाबुव्वा... अम्मा बुव्वा" जैसे पारंपरिक नारे भी लगाए.

सदियों से चली आ रही है परंपरा

एक किसान ने बताया कि सुबह 7 बजे से 11 बजे तक मेंढक यात्रा और पूजा-अर्चना की गई. गांव वाले घर-घर जाकर लोगों से सहयोग राशि (चंदा) भी जुटाते रहे. इसके बाद शाम को गांव में गधे के साथ एक अन्य पारंपरिक धार्मिक जुलूस निकालने की भी योजना बनाई गई, ताकि बारिश के देवता प्रसन्न हों और क्षेत्र में अच्छी बारिश हो सके.

ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. बुजुर्गों का विश्वास है कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों से बारिश होने की संभावना बढ़ती है. किसानों ने कहा कि अब उनकी उम्मीदें सिर्फ अच्छी बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि बारिश नहीं होने पर खरीफ सीजन की फसलें बर्बाद हो सकती हैं.

आयोजकों ने बताया कि पूरे कार्यक्रम के दौरान मेंढकों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया. धार्मिक अनुष्ठान और शोभायात्रा पूरी होने के बाद दोनों मेंढकों को सुरक्षित रूप से गांव के तालाब में छोड़ दिया गया. बोरमपल्ली के किसान अब आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द बारिश हो, ताकि सूखती फसलों को जीवन मिल सके और कृषि गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट सकें.(अपूर्वा का इनपुट)

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