गन्ना उत्पादन में यूपी नंबर-1उत्तर प्रदेश की मिट्टी में गन्ने की मिठास घुली हुई है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस बड़े सूबे में तकरीबन 27-28 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर गन्ने की खेती होती है, और करीब 50 लाख किसानों की रोज़ी-रोटी और ज़िंदगी इसी फसल से जुड़ी हुई है. य़ोगी सरकार कहना है कि पहले की सरकार दौर में किसानों की सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि उन्हें अपनी ही फसल का पैसा सालों-साल नहीं मिलता था. मिलों पर बकाया रकम का पहाड़ खड़ा हो जाता था, पर्ची सिस्टम में भयंकर धांधली होती थी, कई मिलें दिवालिया हो रही थीं,और किसानों को अपने हक़ के पैसों के लिए सड़कों पर उतरकर धरने देने पड़ते थे. लेकिन आज हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े गर्व के साथ ऐलान किया है कि उत्तर प्रदेश अब चीनी, गन्ना और एथेनॉल के उत्पादन में पूरे हिंदुस्तान में नंबर वन राज्य बन गया है. यह कोई रातों-रात हुआ चमत्कार नहीं है, बल्कि सरकार की उन बेहतरीन पॉलिसियों का नतीजा है, जिन्होंने गन्ना किसानों की तकलीफों को समझा और इस सेक्टर को नई ज़िंदगी दी.
किसी भी किसान के लिए सबसे बड़ी खुशी का दिन वह होता है, जब उसकी खून-पसीने की कमाई सही वक्त पर उसके हाथ में आ जाए। सरकार ने इस बात को गहराई से समझा और गन्ने का पेमेंट सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी बना दिया. मुख्यमंत्री ने बताया कि मौजूदा सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को पूरे 3.23 लाख करोड़ रुपये का शानदार और ऐतिहासिक पेमेंट किया है. यह कोई मामूली रकम नहीं है, बल्कि यह वह पैसा है जिसने सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचकर उनकी ज़िंदगी को खुशहाल बनाया है. सिर्फ इतना ही नहीं, किसानों के चेहरे पर और बड़ी मुस्कान लाने के लिए सरकार ने गन्ने का रेट भी बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. सही वक्त पर पेमेंट मिलने और फसल का ज़्यादा दाम मिलने से किसानों की आमदनी में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है. जो किसान कभी कर्ज के बोझ तले दबा रहता था, आज वह आर्थिक रूप से मज़बूत हो रहा है .
मुख्य मंत्री योगी का कहना है अगर हम पुराने वक्त पर नज़र डालें, तो पिछली सरकारों के राज में यूपी की चीनी मिलों का हाल बहुत ही खस्ता था. उस दौर में किसानों की परवाह किए बिना 29 चीनी मिलों पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया गया था. हद तो तब हो गई जब 21 मिलों औने-पौने दामों पर बेच दिया गया. इससे लाखों किसानों की रोज़ी-रोटी छिन गई थी. लेकिन मौजूदा सरकार ने इस डूबती हुई इंडस्ट्री में सचमुच एक नई जान फूंक दी है. सीएम योगी ने साफ लफ़्ज़ों में याद दिलाया कि आज पूरे उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें पूरी कामयाबी और शान के साथ चल रही हैं. उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि अगर खुदा न खास्ता पिछली सरकारें आज भी सत्ता में बैठी होतीं, तो यूपी की पूरी चीनी इंडस्ट्री अब तक पूरी तरह से तबाह होकर बंद हो चुकी होती. आज नई और चालू मिलों की वजह से किसानों को अपना गन्ना बेचने के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता है.
आज की दुनिया में तरक्की का मतलब सिर्फ पुरानी चीजों पर टिके रहना नहीं है, बल्कि नई तकनीक को अपनाना भी है. यूपी सरकार ने गन्ने को सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इससे एथेनॉल बनाने की भी बड़े पैमाने पर शुरुआत की. इस दूरदर्शी कदम ने पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है. आज यूपी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा एथेनॉल पैदा करने वाला सूबा बन चुका है. एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे ईंधन की ज़रूरतें भी पूरी होती हैं. चीनी, गन्ना और एथेनॉल के इस शानदार कॉम्बिनेशन ने गन्ने की पूरी इकॉनमी को एक नई ताकत और रफ्तार दी है. इसी वजह से जो मिलें कभी घाटे का रोना रोती थीं, वे आज मुनाफे में चल रही हैं. इस मुनाफे का सीधा फायदा किसानों को हो रहा है.
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